तिलक सिंदूर से नाग झिरी जलप्रपात तक रोमांचक एक दिवसीय ट्रैकिंग कार्यक्रम संपन्न
आध्यात्म, इतिहास, प्रकृति और रोमांच का अनूठा संगम बना ट्रैकिंग अभियान

भोपाल, 16 अगस्त। यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की बीएचईएल इकाई के तत्वावधान में रविवार, 16 अगस्त को प्रकृति, अध्यात्म, इतिहास और रोमांच से भरपूर एक दिवसीय ट्रैकिंग कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भोपाल से लगभग 130 ट्रेकर्स के दल ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
प्रातःकाल भोपाल से रवाना होकर ट्रेकर्स का दल ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले तिलक सिंदूर धाम पहुंचा। विंध्य क्षेत्र की प्राकृतिक पहाड़ियों और हरियाली से घिरा यह प्राचीन स्थल स्थानीय आस्था एवं धार्मिक परंपराओं से लंबे समय से जुड़ा हुआ है। यहां स्थित प्राकृतिक रूप से निर्मित प्राचीन तिलक सिंदूर मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। पवित्र सावन माह में मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय और मौसम अत्यंत सुहावना रहा।
“बम-बम भोले” एवं “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। भगवान भोलेनाथ के दर्शन एवं पूजन के पश्चात ट्रेकर्स ने प्रकृति की गोद में स्थित नाग झिरी जलप्रपात की ओर अपनी रोमांचक यात्रा प्रारंभ की।
इतिहास और प्रकृति के बीच रोमांचक ट्रैकिंग
तिलक सिंदूर धाम से नाग झिरी जलप्रपात तक का ट्रेक केवल साहसिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, प्राकृतिक विरासत और स्थानीय इतिहास को करीब से अनुभव करने का अवसर भी रहा। प्राचीन धार्मिक स्थल से शुरू हुई यह यात्रा घने हरित क्षेत्र, पहाड़ी पगडंडियों और प्राकृतिक जलधाराओं के बीच आगे बढ़ी।
ट्रेकिंग मार्ग में चारों ओर फैली हरियाली, ऊंची-नीची पहाड़ियां, चट्टानी रास्ते और मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों ने ट्रेकर्स को रोमांचित कर दिया। प्रकृति की गोद में कदम-कदम पर बदलते खूबसूरत नजारों का आनंद लेते हुए सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ ट्रेक पूरा किया।
देशी स्वाद ने बढ़ाया आनंद
ट्रेकिंग के दौरान तिलक सिंदूर धाम में ट्रेकर्स साथियों के लिए देशी तरीके से तैयार किए गए स्वल्पाहार एवं भोजन-प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई। सभी ने सामूहिक रूप से भोजन-प्रसाद ग्रहण कर पारंपरिक देशी व्यंजनों के स्वाद का आनंद लिया। आध्यात्मिक वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और देशी भोजन का यह अनूठा संगम कार्यक्रम को और भी यादगार बना गया।
इसके पश्चात दल नाग झिरी जलप्रपात पहुंचा, जहां ट्रेकर्स ने जल क्रीड़ा का भरपूर आनंद लिया। जलप्रपात के नीचे स्नान कर सभी ने अपनी थकान मिटाई और प्रकृति के बीच आनंद के अविस्मरणीय पल बिताए।
हर उम्र के प्रतिभागियों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग
ट्रैकिंग दल का नेतृत्व बी.आर. नायडू, एस.ए. नकवी एवं सतेन्द्र कुमार ने किया। दल में विद्यार्थी, युवा, युवतियां, तरुण, वरिष्ठ नागरिक एवं मातृशक्ति सहित विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागी शामिल रहे। सभी ने आपसी सहयोग, अनुशासन और उत्साह के साथ ट्रैकिंग का भरपूर आनंद लिया।
सफल आयोजन में सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में आर.के. आर्य, उपेंद्र सिंह, हरीश गुप्ता, जय कुमार, अमित कुमार, अनिल कुमार, धर्मेन्द्र कुमार, रामनंदन सिंह, योगेश सराठे, शम्सुल हक, ए.के. तिवारी, जितेंद्र राय सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
ट्रेकर्स दल की पूरी तैयारी एवं व्यवस्थित रवानगी के अवसर पर दीपेंद्र अग्रवाल, शैलेश अग्रवाल, रमेश कुराडिया सहित संस्था के पदाधिकारी उपस्थित रहे और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
“प्रकृति से जुड़ना ही स्वयं से जुड़ना है”
टीम लीडर सतेन्द्र कुमार ने कहा कि यह आयोजन केवल एक ट्रैकिंग कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, प्रकृति प्रेम, आध्यात्मिक चेतना, ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासत के प्रति सम्मान, साहसिक गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम रहा।
उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में ऐसे आयोजन लोगों को प्रकृति के करीब लाने के साथ-साथ हमारी स्थानीय ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को जानने और उसे संरक्षित करने की प्रेरणा देते हैं। तिलक सिंदूर जैसे आस्था और प्राकृतिक विरासत से जुड़े स्थलों तक सामूहिक रूप से पहुंचना युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और प्रकृति से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम ने सभी प्रतिभागियों को प्रकृति के साथ जुड़ने, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, साहस एवं आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सामूहिकता की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, बीएचईएल इकाई के पदाधिकारियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायी, साहसिक, आध्यात्मिक एवं प्रकृति-आधारित आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की इच्छा व्यक्त की।







