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आरएनटीयू में विद्यार्थियों ने अपने हाथों से गढ़े गणपति, प्रसिद्ध शिल्पकार लखन प्रजापति ने सिखाई प्रतिमा बनाने की कला

मिट्टी मेरी उंगलियां पहचानती है”, आरएनटीयू में विद्यार्थियों से बोले प्रसिद्ध शिल्पकार लखन प्रजापति, सिखाई गणेश प्रतिमा बनाने की कला

भोपाल। आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ साधने की दिशा में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू) में एक सार्थक पहल की गई। एक भारत श्रेष्ठ भारत क्लब एवं कल्चरल क्लब के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय परिसर में पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रसिद्ध शिल्पकार एवं मूर्ति निर्माण विशेषज्ञ लखन प्रजापति ने विद्यार्थियों को प्राकृतिक सामग्री से गणेश प्रतिमा बनाने की कला और उसकी पर्यावरणीय उपयोगिता से परिचित कराया। इस कार्यशाला में जर्नलिज्म विभाग के एचओडी डॉ. योगेश पटेल और डॉ. हर्षा शर्मा मौजूद रहीं।

कार्यशाला का उद्देश्य केवल प्रतिमा निर्माण की तकनीक सिखाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उस परंपरा से जोड़ना था, जिसमें उत्सव के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी निहित है। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने जाना कि मिट्टी जैसी प्राकृतिक एवं जैव-अवक्रमणीय सामग्री से बनाई गई प्रतिमाएं हमारी आस्था को पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ जोड़ सकती हैं।

शिल्पकार लखन प्रजापति ने विद्यार्थियों को प्रतिमा निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं से परिचित कराते हुए अपने हाथों से गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण दिया। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और रुचि के साथ मिट्टी को आकार दिया और अपने हाथों से गणेश प्रतिमाओं को साकार किया।

प्रतिमा निर्माण की इस पूरी प्रक्रिया ने विद्यार्थियों को कला सीखने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और पर्यावरण के बीच के गहरे संबंध को समझने का अवसर दिया।

कार्यशाला में तैयार की गई प्रतिमाओं को विद्यार्थियों ने अपने घर ले जाकर स्थापित करने का संकल्प लिया। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश भी दिया कि परंपराओं को निभाते हुए प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी संभव है।

इस मौके पर कुलगुरु डॉ. आरपी दुबे ने कहा कि यह आयोजन इस विचार को मजबूती देता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों का विषय नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की परंपराओं और उत्सवों में किए गए छोटे-छोटे बदलावों से भी इसकी शुरुआत की जा सकती है।

वहीं, रजिस्ट्रार संगीता जौहरी ने कहा कि मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा के माध्यम से आरएनटीयू ने आस्था के साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी दिया है।

कार्यशाला में विद्यार्थियों के साथ विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं कर्मचारी भी उत्साहपूर्वक सहभागी बने। परिसर में मिट्टी को आकार देते विद्यार्थियों के बीच आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला।

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