कल के भारत निर्माण के लिए गायत्री परिवार के युवा संकल्पित हुए

भोपाल 13 सितंबर – अखिल विश्व गायत्री परिवार का युवा आंदोलन युवाओं के व्यक्तित्व विकास के बाद उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण की एक नर्सरी के रूप में काम कर रहा है। हम युवाओं को नैतिक एवं चारित्रिक रूप से सबल बनाकर राष्ट्र को समर्पित कर रहे हैं। यह उद्गार श्री आशीष सिंह वरिष्ठ प्रतिनिधि शांतिकुंज हरिद्वार ने गायत्री शक्तिपीठ एम पी नगर पर आयोजित प्रादेशिक युवा चिंतन कार्यशाला में व्यक्त किए ।आपने बताया कि अभी संस्कृति की सीता की खोज जैसा महत्वपूर्ण कार्य हम कर चुके हैं अब युद्ध के बाद सीता को वापस लाने का एक चरण बाकी है। इस कार्य के लिए उन्होंने युवाओं से अपनी प्रतिभा, समय और भावनाओं के समर्पण का संकल्प कराया।
परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष (2026)के लक्ष्यों की प्रगति समीक्षा के लिए आयोजित इस कार्यशाला में डॉ. राहुल सतुना ने युवा जोड़ो अभियान,श्री जितेंद्र प्रज्ञेय ने व्यसनमुक्ति अभियान,श्री मनोज तिवारी ने पर्यावरण संवर्धन अभियान ,श्री सुभाष बघेल ने साहित्य विस्तार अभियान तथा डॉ. दयानंद समेले ने बाल संस्कारशाला अभियान के संचालन संबंधी व्यवहारिक सूत्र बताएं।
यहां के मंच पर जोश और होश का संतुलन दिखाई दिया। युवा आंदोलन के संस्थापक एवं मार्गदर्शक प्रोफेसर रमन, श्री सदानंद आंबेकर जैसे वरिष्ठ परिजनों ने वक्तव्यों की समीक्षा करते हुए युवाओं को आशीर्वाद दिया। युवा प्रकोष्ठ के प्रांतीय समन्वयक श्री विवेक चौधरी ने प्रदेश के सभी जिलों से आए युवा जिला समन्वयकों को बताया कि सभी आंदोलन समयदान से ही सफल होंगे । अतः समयदान के लिए संकल्पित होकर जाइए।
प्रदेश सह समन्वयक श्री अमर धाकड़ ने कार्यशाला की उपयोगिता और महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हमें हमेशा सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए। डिजिटल तकनीकी में निपुण होकर पेपरलेस रिपोर्टिंग करनी चाहिए।
कार्यशाला में 40 जिलों के युवा प्रकोष्ठ समन्वयक और उनके प्रतिनिधियों सहित 150 से अधिक युवाओं में भागीदारी की।
गोष्ठी में समापन पूर्व सभी उपस्थित जिला समन्वयकों ने विविध अभियानोंं में अपने संकल्प लिखित में व्यक्त किये ।
जिला संगठन समन्वयक श्री रमेश नागर जी ने उपस्थित अतिथियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। आपने जानकारी दी की गायत्री शक्तिपीठ पर इको फ्रेन्डली गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध हैं।
कार्यशाला का संचालन श्री गोपाल विश्वकर्मा ने बहुत ही गरिमामय तरीके से किया।
कार्यक्रम की योजना, डेटा सहयोग फॉलो अप में अनमोल पाठक, पंकज बरोडे, योगेश हारोड, पंकेश घोडकी, गोविंद विश्वकर्मा का विशेष सहयोग रहा।
व्यवस्था सहयोग में शांति दीदी, ओ पी विश्वकर्मा, आर पी गुप्ता, बलराम केशरी, भुवनेश्वर जी आदि की भूमिका रही।


