2047 का घर उम्र के साथ बदले: मध्यप्रदेश में 60+ आबादी की हिस्सेदारी 2036 तक 12.8% अनुमानित

‘कमाल का भोपाल’ रिसर्च ने एजिंग-इन-प्लेस, अस्पताल-संबद्ध रिकवरी, मध्यम आय और तकनीक-सहायक स्वस्थ आवास की ज़रूरतों को पहचाना।
विकास योजना 2047 जिन लोगों के लिए बन रही है, उनमें आज के युवा ही नहीं, वही नागरिक भी शामिल हैं जो अगले 10–20 वर्षों में वरिष्ठ आयु वर्ग में पहुंचेंगे। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ‘एल्डरली इन इंडिया 2021’ रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी की हिस्सेदारी 2021 में 8.5 प्रतिशत आंकी गई थी और 2036 के लिए 12.8 प्रतिशत का अनुमान है। यह राज्य-स्तरीय अनुमान है लेकिन 2047 की शहरी योजना के लिए संकेत स्पष्ट है – घर, मोहल्ला और सेवाएं ऐसी हों कि लोग उम्र बढ़ने के साथ शहर से बाहर न धकेले जाएं।
क्रेडाई भोपाल और ‘कमाल का भोपाल’ के भविष्य-केंद्रित रिसर्च ने इसी आधार पर ‘एजिंग-इन-प्लेस’ और वरिष्ठ-अनुकूल आवास को विकास योजना की चर्चा में लाने का प्रस्ताव रखा है। इसका केंद्र ‘लॉन्जेविटी’ टाउनशिप के साथ-साथ, कई स्तरों की आवश्यकता है – अपने मौजूदा घर में सुरक्षित रूप से उम्र बढ़ाना, मध्यम आय वर्ग के लिए सेवा-सहायक आवास, अस्पताल-संबद्ध रिकवरी निवास, तकनीक-सहायक स्वस्थ आवास और जहां वास्तविक मांग हो वहां अधिक सेवायुक्त वरिष्ठ आवास।
नीति आयोग की 2024 की ‘सीनियर केयर रिफॉर्म्स इन इंडिया’ रिपोर्ट घर-आधारित देखभाल और ‘एजिंग-इन-प्लेस’ को महत्वपूर्ण नीति-दिशा मानती है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है; आवास, सामाजिक संपर्क, वित्तीय सुरक्षा, डिजिटल पहुंच, गतिशीलता और देखभाल सेवाओं का समन्वय आवश्यक है। वरिष्ठ आवास परियोजनाओं के लिए एकल-खिड़की जैसी व्यवस्था तथा घर-आधारित सेवाओं को बढ़ाने पर भी विचार रखा गया है।
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की 2019 मॉडल गाइडलाइंस भी उपयोगी परिचालन संकेत देती हैं। वरिष्ठ आवास में पंजीकृत सेवा प्रदाता, 24 घंटे आवश्यक उपयोगिताएं, सुरक्षा और रखरखाव, एंबुलेंस तथा अस्पताल व फार्मेसी संपर्क, आपात चिकित्सा व्यवस्था और डेवलपर–ऑपरेटर–आवंटी के बीच जिम्मेदारियों की स्पष्टता जैसे तत्व रखे गए हैं। इन दिशानिर्देशों को मध्यप्रदेश में स्वतः लागू कानून या अतिरिक्त एफएआर का अधिकार नहीं माना जा सकता, लेकिन भोपाल के लिए बेहतर मानक तय करने में वे उपयोगी संदर्भ हैं।
मनोज मीक के नेतृत्व में ‘कमाल का भोपाल’ रिसर्च का महत्वपूर्ण निष्कर्ष है कि वरिष्ठ आवास को केवल जमीन और भवन उत्पाद के रूप में देखना जोखिमपूर्ण होगा। यदि किसी परियोजना का मूल्य अस्पताल-टाईअप, डायग्नोस्टिक सेवा, आपात प्रतिक्रिया, डिजिटल स्वास्थ्य, भोजन या देखभाल पर आधारित है, तो खरीदार को यह पता होना चाहिए कि इन सेवाओं का कानूनी ऑपरेटर कौन है, शुल्क कैसे बढ़ेगा, सेवा प्रदाता बदलने पर क्या होगा और निवासी बाहर निकलना चाहे तो उसकी व्यवस्था क्या है। संपत्ति का स्वामित्व और सेवा का अनुबंध अलग-अलग स्पष्ट होना चाहिए।
इसलिए रिसर्च ने किसी नए ‘सीनियर लिविंग ज़ोन’ या स्वतः अतिरिक्त एफएआर के बजाय पायलट-आधारित परीक्षण सुझाया है। पहला प्रश्न स्थानीय मांग का हो – भोपाल में कितने परिवार खरीदना, किराए पर लेना या अपने मौजूदा घर में सहायता लेना पसंद करेंगे। दूसरा कुल लागत का – सिर्फ मकान की कीमत नहीं, रखरखाव, देखभाल, डायग्नोस्टिक, परिवहन और संभावित स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च। तीसरा सेवा क्षमता – पास का अस्पताल वास्तव में आपातकालीन चिकित्सा स्वीकार करेगा या केवल नाम का समझौता होगा। चौथा ऑपरेटर और प्रशिक्षित कार्यबल। पांचवां बिजली, पानी, पहुंच और डिजिटल विश्वसनीयता।
शहर-स्तर पर इससे भी बड़ा अवसर ‘एजिंग-इन-प्लेस’ में है। फुटपाथ पर बाधा न हो, सड़क सुरक्षित पार की जा सके, पार्क और दैनिक बाजार पैदल दूरी में हों, बस स्टॉप तक पहुंच आसान हो, इमारतों में लिफ्ट और सुलभ प्रवेश हों, घर में गिरने का खतरा कम करने वाले डिजाइन विकल्प हों और जरूरत पर घर तक स्वास्थ्य या देखभाल सेवा पहुंच सके। ये सुधार वरिष्ठ नागरिकों के साथ बच्चों, दिव्यांगों और अस्थायी रूप से घायल लोगों के लिए भी शहर को बेहतर बनाते हैं।
क्रेडाई भोपाल और ‘कमाल का भोपाल’ की 2024 से चले आ रहे रिसर्च बेस्ड अर्बन विजन में पर्यटन, वेलनेस, स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी, नॉलेज इकोनॉमी और जीवन-गुणवत्ता को निवेश के साथ जोड़ने का प्रयास रहा है। वरिष्ठ-अनुकूल भोपाल उसी निरंतरता का नया सामाजिक-आर्थिक आयाम है।
2047 तक अच्छी योजना की पहचान यह भी होगी कि नागरिक को उम्र बढ़ने पर अपना परिचित मोहल्ला छोड़ना न पड़े। भोपाल यदि आज से आवास, सार्वजनिक स्थान, परिवहन और देखभाल को इस विजन से तैयार करता है तो सीनियर फ़्रेंडली सिटी कोई अलग परियोजना नहीं, पूरे शहर की गुणवत्ता का मानक बन सकता है।
‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान के फाउंडर मनोज मीक कहना है: “2047 की योजना में आज के 40–50 वर्ष के नागरिक को भी देखना होगा; वही इस योजना-अवधि में वरिष्ठ नागरिक होगा। वरिष्ठ आवास का भविष्य केवल अलग परिसर ही नहीं है, पूरे भोपाल को ऐसा बनाना है जहां व्यक्ति अपने परिचित घर और मोहल्ले में गरिमा के साथ सुरक्षित ढंग से उम्र बढ़ा सके।”
— सचिवालय, क्रेडाई भोपाल
स्रोत –
* राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, ‘Elderly in India 2021’, Figure 2.4 – मध्यप्रदेश 60+ हिस्सेदारी 8.5% (2021), 12.8% (2036 अनुमान); राज्य-स्तरीय आंकड़ा।
* नीति आयोग, ‘Senior Care Reforms in India – Reimagining the Senior Care Paradigm’, फरवरी 2024।
* केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय/पीआईबी, Model Guidelines for Development and Regulation of Retirement Homes, 6 मार्च 2019।
* ‘कमाल का भोपाल’ कैनोनिकल शोध – भोपाल-विशिष्ट मांग, वहनीयता, सेवा-क्षमता, ऑपरेटर-निरंतरता, साइट और दावों के लिए आठ-स्तरीय परीक्षण।



