जीएसटी काउंसिल के फैसले सकारात्मक, रियल एस्टेट पर सीधा असर सीमित: मनोज मीक
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में टैक्स दरों के बजाय रजिस्ट्रेशन, रिफंड और टैक्स से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। क्रेडाई भोपाल ने इन फैसलों को कारोबार के लिए सकारात्मक कदम बताया है, हालांकि रियल एस्टेट और आवास क्षेत्र पर इनका तत्काल सीधा असर सीमित रहेगा। जियो-पालिटिकल स्थितियों के परिप्रेक्ष्य में बाजार में सकारात्मकता बनाए रखना जरूरी है, हालाँकि विगत दिनों रिजर्व बैंक की रेपो रेट में बढ़ोतरी से मार्केट की सकारात्मकता कमज़ोर हुई है।
क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने कहा कि निर्माणाधीन आवास पर मौजूदा जीएसटी दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। किफायती आवास पर प्रभावी दर 1 प्रतिशत और अन्य निर्माणाधीन आवास पर 5 प्रतिशत, बिना आईटीसी, की व्यवस्था फिलहाल जारी है। इसलिए आज के फैसलों को घरों की कीमत में सीधे कमी से जोड़ना सही नहीं होगा।
काउंसिल ने रिफंड प्रक्रिया तेज करने, रजिस्ट्रेशन आसान करने और छोटे टैक्स विवादों में अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई कम करने जैसे सुधार मंजूर किए हैं। इनसे डेवलपर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और अन्य कारोबारियों की फंसी हुई रकम तथा कागजी प्रक्रिया में कुछ राहत मिल सकती है। खरीदार को सप्लायर की गलती के कारण मिलने वाली टैक्स क्रेडिट से जुड़े मुद्दे को अभी आगे की जांच के लिए समिति को भेजा गया है।
मीक ने कहा, “रियल एस्टेट के लिए आज सबसे महत्वपूर्ण बात टैक्स दर में बदलाव नहीं, बल्कि नियमों को सरल, साफ और समयबद्ध बनाना है। तेज रिफंड और कम कानूनी उलझन कारोबार के माहौल को बेहतर करेंगे, लेकिन घर खरीदारों के लिए वास्तविक राहत तभी होगी जब आवास की कुल लागत घटे।”
क्रेडाई भोपाल और ‘कमाल का भोपाल’ रिसर्च भी लंबे समय से यही रेखांकित करता है कि निवेश बढ़ाने के लिए केवल प्रोत्साहन नहीं, बल्कि सरल नियम, तेज फैसले और कम प्रशासनिक उलझन भी जरूरी हैं।
क्रेडाई का मानना है कि “आज की जीएसटी काउंसिल बैठक से रियल एस्टेट पर कोई बड़ा सीधा असर नहीं है, क्योंकि आवास की जीएसटी दरें नहीं बदली हैं। सकारात्मक पक्ष यह है कि रिफंड, रजिस्ट्रेशन और टैक्स से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया आसान होगी। इससे कारोबार में फंसी रकम और अनावश्यक परेशानी कम हो सकती है। घर खरीदार को असली राहत तभी होगी जब उसकी कुल आवास लागत घटे।

