राम भारत के चरित्र हैं, जिन्होंने हमें मर्यादा का पाठ पढ़ाया: माननीय संस्कृति मंत्री
मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य परम्परा में साकार हुई श्रीराम की दिव्य गाथा, नृत्य-नाटिका ‘श्रीराम पर्व’ में जीवंत हुए रामायण के प्रसंग
भोपाल। श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा आयोजित सुप्रतिष्ठित सात दिवसीय ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ का शुभारंभ सोमवार को रवीन्द्र भवन में गरिमामय वातावरण में हुआ। इस अवसर पर माननीय संस्कृति मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, वरिष्ठ विचारक डॉ. इंद्रेश कुमार, माननीय विधायक डॉ. अजय विश्नोई, तुलसी मानस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा एवं संचालक, संस्कृति एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास श्री एन.पी. नामदेव भी मंचासीन रहे। आभार प्रदर्शन श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास के प्रभारी अधिकारी श्री अमित कुमार यादव ने किया।
इस अवसर पर माननीय संस्कृति मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि राम इस देश के चरित्र हैं। राम इस देश को मर्यादा का पाठ पढ़ाने वाले हैं। राम का जब चरित्र चित्रण हो रहा तो कहीं न कहीं हमें हमारे सनातन संस्कृति के गौरव का अनुभव भी होता है। श्रृष्टि के कण कण में परम पिता समाये हुए हैं, यह कहने वाला हमारा सनातन है। रामलीला का प्रदर्शन वर्षों से हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है, लेकिन समय के साथ यह पवित्र परंपरा खत्म हो रही थी। इसलिए संस्कृति विभाग द्वारा इसे भव्यता के साथ प्रदर्शित किया जा रहा है, ताकि हमारे भारतीय संस्कार और संस्कृति का लोकव्यापीकरण हो सके।
भारतीय संस्कृति के इस आध्यात्मिक महापर्व के शुभारंभ अवसर का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में संस्कृति-प्रेमी उपस्थित रहे। उत्सव के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं एवं जीवन-मूल्यों को कला, साहित्य और वैचारिक विमर्श के विविध माध्यमों से जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। श्रीरामकथा के विविध प्रसंगों को कला की अनेक विधाओं के माध्यम से प्रस्तुत करते इस बहुकला उत्सव को संस्कृति-प्रेमियों ने खूब सराहा। विभिन्न कला-परंपराओं के अनूठे संगम ने दर्शकों को भावविभोर किया, वहीं श्रीराम के जीवन-दर्शन और आदर्शों को नए दृष्टिकोण से जानने-समझने का अवसर भी प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित की जा रही है।
राम का राज्य छुआछूत और अधर्म से मुक्त : डॉ. इन्द्रेश कुमार
अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन का शुभारंभ सोमवार को हुआ। पहले दिवस का विषय — रामराज्य की संकल्पना था, जिस पर अपने विचार प्रस्तुत करने वरिष्ठ अध्येता डॉ. इन्द्रेश कुमार उपस्थित थे। साथ ही मंच पर माननीय संस्कृति मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी एवं माननीय विधायक डॉ. अजय विश्नोई विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत संचालक, संस्कृति श्री एन.पी.नामदेव ने किया। डॉ. इन्द्रेश कुमार ने विषय पर बोलते हुए कहा कि “दोनों नवरात्र प्रभु राम से जुड़े हुए हैं। ग्रीष्म ऋतु वाला नवरात्र श्रीराम के जन्म से और शारदीय नवरात्र रामराज्य को साकार करने के लिए निर्देशित करता है। हमारे देश में दो ग्रंथ प्रसिद्ध हैं, एक रामायण और दूसरा महाभारत। रामायण कर्तव्य प्रधान ग्रन्थ है, महाभारत अधिकार प्रधान है। मानव जाति के उदय से लेकर अब तक रामायण का परिवार इकलौता है, जो कर्तव्य परायण का अनुपम उदाहरण है। नासा ने रामसेतु के निर्माण को 12 से 15 लाख वर्ष प्राचीन बताया है। कहा गया है कि जिसके पालक श्रीराम हैं, उस राज्य में सम्मान, भोजन और सुरक्षा स्वतः ही होगी। राम का राज्य छुआछूत, अधर्म से मुक्त है। सत्य को अपनाना राम बनना है और असत्य को अपना रास्ता चुनना रावण बनना है। अंत में उन्होंने कहा कि नारी संसार का आधार है, नारी है तो संसार है।” इसके बाद माननीय संस्कृति मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि”राम भारत देश के चरित्र हैं, राम जन जन में समाया शब्द है। रामराज्य चाहते हैं तो राम के आदर्शों को जीवन में उतारना होगा। माता— पिता का सम्मान सर्वोपरि है।
कलात्मक एवं भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत
अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के पहले दिन जवाहरलाल नेहरू मणिपुर नृत्य अकादमी, मणिपुर के कलाकारों द्वारा नारद मोह, श्रीराम जन्म, विद्या अभ्यास एवं ताड़का वध के प्रसंगों को कलात्मक एवं भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया गया। मणिपुरी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाटिका का शीर्षक ‘श्रीराम पर्व’ था, जिसमें भगवान श्रीराम के दिव्य जीवन, आदर्शों और धर्म की विजय की कथा को मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य परंपरा के माध्यम से मंच पर साकार किया गया। भगवान श्रीराम के जीवन के प्रमुख प्रसंगों पर केंद्रित यह प्रस्तुति शास्त्रीय नृत्य की भावाभिव्यक्ति, लयबद्ध पद-संचालन, पारंपरिक संगीत और भक्तिमय धुनों का सुंदर समन्वय रही। नृत्य-नाटिका में अभिनय, नृत्य की कोमलता और लयकारी के माध्यम से विभिन्न प्रसंगों को कलात्मक एवं भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया गया।
यज्ञ की पवित्रता एवं ऋषियों की साधना की रक्षा
भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम के जन्म के साथ नृत्य-नाटिका का शुभारंभ होता है। अयोध्या में श्रीराम के आगमन को दिव्य कृपा, आशा और धर्म की स्थापना के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। आनंद, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण यह प्रसंग श्रीराम की दिव्य जीवन-यात्रा का आरंभ है। इसके बाद अयोध्या के चारों राजकुमार श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में ज्ञान, अनुशासन और शस्त्रविद्या प्राप्त करते हैं। इसी दौरान महर्षि विश्वामित्र, महर्षि वशिष्ठ से सहायता का आग्रह करते हैं, ताकि राक्षसी ताड़का द्वारा उनके यज्ञ में उत्पन्न किए जा रहे विघ्नों से उसकी रक्षा की जा सके। महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण यज्ञ की रक्षा के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं। ताड़का द्वारा यज्ञ में विघ्न उत्पन्न किए जाने पर दोनों राजकुमार साहस और पराक्रम के साथ उसका सामना करते हैं। ताड़का का वध कर वे यज्ञ की पवित्रता और ऋषियों की साधना की रक्षा करते हैं।
20 फीट का मधुबनी चित्र, 600 वर्ष प्राचीन दुर्लभ सिक्का
अंतर्राष्ट्रीय रामलीला उत्सव में संयोजित की जा रहीं विविध प्रदर्शनियां आयोजन को बहुरंगों से सजा रही है। इन प्रदर्शनियों में देश के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक एवं समकालीन चित्रकला, शिल्पकला, दस्तावेज, पांडुलिपि, संग्रह इत्यादि प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इसमें विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की पट चित्र, बिहार की मधुबनी चित्रकला में उकेरे गये श्रीरामकथा केंद्रित चित्र विशेष हैं। 20 फीट लंबे मधुबनी के चित्र में सीता स्वयंवर का दृश्य उकेरा गया है। वहीं, पट चित्र में उकेरा गया सीता हरण का दृश्य भी आकर्षण का केंद्र है। इसी क्रम में भोपाल के संग्रहकर्ता श्री वी.के. पथोरिया द्वारा प्रस्तुत सिक्कों का संग्रह आमजन का ध्यान आकर्षित कर रहा है। उनके संग्रह में लगभग 600 वर्ष प्राचीन श्रीराम केंद्रित दुर्लभ सिक्का है। साथ ही वर्ष 2019 में थाईलैंड सरकार द्वारा जारी श्रीराम दरबार का दुर्लभ सिक्का भी प्रदर्शित किया गया है।
भजन जैमिंग से राममयी हुआ वातावरण
अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के पहले दिन रामलीला प्रदर्शन के बाद भजन जैमिंग ने उपस्थित संस्कृति प्रेमियों को दिव्यता से सराबोर कर दिया। हृदय बैंड, भोपाल के कलाकारों ने भक्ति भाव के सुरों को बिखेर दिया। उन्होंने राम भक्ति, हनुमान महिमा, माँ की आराधना और राधा-कृष्ण के प्रेम से सराबोर भजनों को।प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीराम स्तुति और मधुर भजनों से हुई, जिसमें ‘पुण्य प्रतापी’, ‘राम राम जय राजा राम’, ‘मंगल भवन’ और ‘सियाराममय सब जग जानी’ जैसे भजनों ने भक्तिमय वातावरण का निर्माण किया। इसके बाद ‘राम आएँगे’, ‘सजा दो’, ‘तुम उठो सिया’, ‘हमारे साथ श्री रघुनाथ’, ‘राम रामा रटते’, ‘हनुमान चालीसा’, ‘दुनिया चले ना’ और ‘कीजो केसरी के लाल’ जैसे भजनों से पूरा माहौल राममय हो गया। माँ की भक्ति को समर्पित ‘माँ के बराबर कोई नहीं’, ‘मैं बालक तू माता’, ‘चलो बुलावा आया है’, ‘तूने मुझे बुलाया’ और ‘जय माता दी’ जैसे लोकप्रिय भजनों की गूंज सुनाई दी। वहीं, राधा-कृष्ण भजनों में ‘अच्युतम् केशवम्’, ‘तुम प्रेम हो’, ‘राधिका गोरी’, ‘मीठे रस’, ‘श्रीकृष्ण गोविंद’, ‘अरे द्वारपालो’, ‘छोटी-छोटी’ और ‘गोविंद बोलो’ जैसी प्रस्तुतियाँ प्रेम, माधुर्य और भक्ति की अनूठी छटा बिखेरी।
अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव में आज
अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का दूसरा दिवस मंगलवार को विविध कलाओं से सजा रहेगा। रामलीला प्रदर्शन के अंतर्गत सायं 7 बजे से सत्रिया केन्द्र, गुवाहाटी, असम के कलाकारों द्वारा सत्रिया नृत्य शैली में अहल्या उद्धार, पुष्प वाटिका, सीता स्वयंवर एवं लक्ष्मण परशुराम संवाद होगा। वहीं, गौरांजनी सभागार, रवीन्द्र भवन में प्रथम सत्र दोपहर 12 से 1:30 बजे तक होगा। इसका केन्द्रीय विषय ‘रामायणकालीन पारिस्थितिकी तंत्र’ होगा। जिसकी मुख्य वक्ता सुश्री मित्रा देसाई – शोधकर्ता, ऑस्ट्रेलिया होंगी। अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. भगवातीलाल राजपुरोहित – इतिहासकार एवं साहित्यकार, उज्जैन होंगे एवं सारस्वत वक्ता श्री पवन सिंह – शोधकर्ता, आजमगढ़ होंगे। द्वितीय सत्र 2:15 से 3:45 तक होगा। जिसका केन्द्रीय विषय ‘लोककथाओं में श्रीराम’ है। इसके मुख्य वक्ता श्री दिसनायके मुदियंसेलागे महील भंडारा – शोधकर्ता, श्रीलंका होंगे। वहीं, अध्यक्षता डॉ. पेरिसेट्टी श्रीनिवास, वरिष्ठ अध्येता, विजयवाड़ा एवं सारस्वत वक्ता श्री कुलदीप अग्निशेखर – लेखक, श्रीनगर तथा डॉ. बाला वेंकटेश्वर राव संकुरात्रि – शोधकर्ता, गुंटूर होंगे। सायं 4:10 से 4:40 बजे तक स्वरांकन गतिविधि होगी, जिसमें सुर, ताल और रंगों में प्रभु श्रीराम का सजीव चित्रण होगा। सायं 4:45 से 6:15 बजे तक तृतीय सत्र में “श्रीराम : आदर्श नेतृत्व और सुशासन का वैश्विक मॉडल” विषय पर विमर्श होगा। मुख्य वक्ता आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण जी महाराज, अयोध्या, महंत, हनुमत निवास पीठ होंगे। सत्र की अध्यक्षता श्री रघुनंदन शर्मा, तुलसी मानस प्रतिष्ठान, भोपाल करेंगे तथा सारस्वत वक्ता श्री उमाशंकर पचौरी, शिक्षाविद एवं लेखक, भोपाल होंगे। साथ ही दोपहर 3 से सायं 5 बजे तक रवीन्द्र भवन परिसर में कठपुतली प्रदर्शन होगा। इसमें श्री बालकृष्ण गणपत मस्गे, दयती लोककला संवर्धन अकादमी, पिंगुली (सिंधुदुर्ग), महाराष्ट्र द्वारा रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर एकांकी प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा विभिन्न प्रदर्शनियां एवं राघव के रंग चित्रकला शिविर का आयोजन प्रात: 11 बजे से सायं 6 बजे तक ललित कला गैलरी, रवीन्द्र भवन में होगा।


