बीडीए के सीईओ श्यामवीर सिंह को मेट्रोपॉलिटन रीजन प्रपोज़ल सौंपा
मीक के रिसर्च में रोजगार, विरासत और नई अर्थव्यवस्था का संगम

क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने बीडीए को 154 पेज का भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन प्रपोज़ल सौंपा। ‘कमाल का भोपाल’ की लंबी रिसर्च पर आधारित दस्तावेज में 42 रणनीति खंड, 13 लिखित उत्तर और 8 प्रोजेक्ट प्रस्ताव हैं। इसमें राजधानी की खूबियों को रोजगार, बेहतर आवास और निवेश के अवसरों में बदलने का रास्ता दिया गया है। शोध का मुख्य निष्कर्ष है कि विरासत, प्रकृति, संस्थान और उद्योग साथ विकसित हों। ‘ट्विन आर्क’ में भोपाल तथा इंदौर–उज्जैन के आर्थिक सहयोग का प्रस्ताव है। संस्थानों को उद्योगों की जरूरतों से जोड़कर एआई, स्किल और स्थानीय उद्यम बढ़ें; रोजगार के पास घर हों। भीमबेटका, सांची और झीलों से जुड़े पर्यटन में स्थानीय गाइड, शिल्प और होटल सेवाओं के अवसर सुझाए गए हैं। हर प्रोजेक्ट के साथ जरूरी सेवाएं, पैसा और रखरखाव पर भी ज़ोर दिया गया है।
मीक के अनुसार, सीईओ ने बैठक में बीडीए की विकसित योजनाओं की हाउसिंग और कमर्शियल जमीन को बिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए डेवलपर्स के सामने शोकेस करने की संभावना सुझाई। शुरुआत भोपाल के डेवलपर्स की बैठक से और मध्यप्रदेश के अन्य क्रेडाई चैप्टर्स को ऑनलाइन जोड़कर करने की योजना है। उन्होंने बताया कि क्रेडाई के करीब 15000 डेवलपर्स वाले राष्ट्रीय नेटवर्क तक प्रॉपर्टीज पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। जनवरी 2027 में दिल्ली के प्रस्तावित क्रेडाई कॉनक्लेव में करीब 4000 संभावित प्रतिभागियों के सामने राज्य शासन, बीडीए और नगर निगम के प्रोजेक्ट रखने की तैयारी है। नॉलेज शेयरिंग वर्कशॉप और ग्लोबल इन्वेस्टर समिट 2027 में भागीदारी पर भी बातचीत हुई। नॉलेज एंड एआई सिटी ‘इकाई’ के लिए मीक ने राज्य सरकार से शीघ्र लगभग ₹100 करोड़ की शुरुआती सीड फंडिंग की मांग की है। केंद्र की 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप पहल में भोपाल को प्रतिस्पर्धी चयन से सहयोग मिलना प्रस्तावित है। मीक का आग्रह है कि भोपाल की दावेदारी के लिए संस्थानों, स्किल, जमीन और सुविधाओं की तैयारी तेज हो।
ठोस शुरुआत के लिए क्रेडाई का सुझाव है कि बीडीए प्रॉपर्टीवार नक्शे, अनुमत उपयोग, कीमत और भुगतान की शर्तें सामने रखे तथा ‘इकाई’ के पहले चरण का काम और खर्च स्पष्ट करे। प्रॉपर्टी बिक्री, सरकारी सहायता और नियमित आय अलग रखकर निवेश की योजना बने, ताकि निवेशकों को स्पष्टता और नागरिकों को सेवाओं व स्थानीय रोजगार का लाभ मिल सके।



