अल्बानिया में विद्रोह पर उद्धव ठाकरे की पार्टी में दो फाड़, संजय राऊत पर प्रियंका चतुर्वेदी का जोरदार पलटवार

नई दिल्ली: अल्बानिया में सत्ता के खिलाफ भड़के विद्रोह पर उद्धव ठाकरे की पार्टी में भयंकर टकराव हो गया है। शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राऊत ने जहां अल्बानिया का हवाला देकर भारत को सीख लेने की नसीहत दी है, तो पार्टी की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने उनपर जोरदार पलटवार कर कहा है कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत ही मजबूत हैं और इसे किसी से सीख लेने की जरूरत नहीं और खासकर हिंसा से तो कतई नहीं। शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद और पार्टी की प्रवक्ता रहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि ‘भारत को किसी और देश से सीखने की जरूरत नहीं है। जिस तरीके से लोकतांत्रिक प्रदर्शन चल रहे हैं…हां हम जरूर बात कर रहे हैं कि दिल्ली पुलिस ने किस तरह से मारपीट की और हिंसा हुई…लेकिन हम ये नहीं कह रहे हैं कि रिजीम चेंज जो होगा वह हिंसा के माध्यम से ही होगा।’
बांग्लादेश में इस्लामिक मूवमेंट था’
उद्धव ठाकरे की पार्टी की नेता ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि बांग्लादेश की तरह रिजीम चेंज हो, वह बहुत ही गलत है। उनके मुताबिक, ‘बांग्लादेश प्रोटेस्ट में स्टूडेंट के बाद इस्लामिक मूवमेंट पूरा आ गया था। जहां पे हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले हुए थे। इस तरह का हिंसक तखतापलट किसी भी लोकतंत्र में उचित नहीं होता है।..हमें यह देखना चाहिए कि हमारे संस्थान मजबूत हैं। हमें पेरिस, अल्बानिया से सीखने की जरूरत नहीं है।’
संजय राऊत का सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भड़काऊ पोस्ट
इससे पहले संजय राऊत ने एक पोस्ट करके अल्बानिया की घटनाओं से सीखने की नसीहत देकर सियासी खलबली मचा दी है। उन्होंने लिखा कि ‘अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया, क्योंकि कथित तौर पर वह भ्रष्ट प्रधानमंत्री की मदद कर रहा था। संसद और सरकारी दफ्तर को भी निशाना बनाया, मंत्रियों के घरों पर भी हमला किया। सभी देशों को इससे सबक सीखनी चाहिए, खासकर भारत को।’



