
मेरठ: नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन इस मामले की एक ऐसी कहानी भी है, जिसमें दो बुजुर्गों की जिंदगी आज भी ठहरी हुई है। ब्रह्मपुरी के इंदिरा नगर में जिस मकान में सौरभ राजपूत की हत्या हुई थी, उसका एक हिस्सा डेढ़ साल बाद भी पुलिस के ताले में बंद है। मकान मालिक ओमपाल और उनकी पत्नी अब प्रशासन से सिर्फ एक गुहार लगा रहे हैं- हमारा घर खुलवा दो, हमें अब इस मकान से कोई सामान नहीं चाहिए। करीब 70 साल के ओमपाल के लिए यह मकान कभी बुढ़ापे का सहारा था। किराए से घर का खर्च चलता था, लेकिन अब वही मकान आर्थिक संकट और सामाजिक बदनामी की वजह बन गया है। ओमपाल का कहना है कि हत्या उन्होंने नहीं की, फिर भी लोग उन्हें ऐसे देखते हैं जैसे इस वारदात के लिए वही जिम्मेदार हों।
किराया 6 हजार रुपये, अब बिजली बिल तक बना बोझ
ओमपाल ने दुखी मन से बताया की उन्होंने वर्ष 2022 में सौरभ और मुस्कान को 3,500 रुपये महीने के किराए पर मकान दिया था। बाद में किराया बढ़कर छह हजार रुपये हो गया। परिवार के साथ रहने और पड़ोस में मुस्कान का मायका होने के कारण उन्हें उन पर भरोसा था। कभी किराए को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ। 17 मार्च 2025 को मुस्कान के घर छोड़ने के बाद से मकान का संबंधित हिस्सा बंद है। ओमपाल का दावा है कि पुलिस ने उसे सील कर रखा है और चाबी भी उसी के पास है। परिवार न उस हिस्से का इस्तेमाल कर पा रहा है, न उसे किराए पर दे सकता है। बिजली का बिल लगातार आ रहा है, जबकि आमदनी का एक सहारा खत्म हो गया है।
घर में कपड़े से लेकर वॉशिंग मशीन तक सब वैसा ही
ओमपाल बताते हैं कि मकान के बंद हिस्से में आज भी मुस्कान और उसकी बेटी पीहू के कपड़े, वॉशिंग मशीन, डस्टबिन और अन्य घरेलू सामान उसी तरह पड़ा है। उन्होंने घटना के बाद से अंदर जाकर कुछ नहीं देखा। उनका कहना है कि उन्हें मुस्कान या सौरभ का कोई सामान नहीं चाहिए। पुलिस चाहे तो सामान के बारे में नियमानुसार फैसला करे, लेकिन उन्हें उनका मकान वापस मिलना चाहिए। ओमपाल कहना है कि घर खुलवाने के लिए उन्होंने वकील भी किया और 10 हजार रुपये तय किए, जिनमें पांच हजार रुपये दे चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला। पुलिस की ओर से उन्हें बताया गया कि अदालत के आदेश के बाद ही मकान खोला जाएगा।
नहीं मिलता मकान का खरीदार
करीब 200 गज के दो मंजिला मकान की कीमत ओमपाल 85 लाख रुपये से अधिक बताते हैं। उनका कहना है कि वारदात के बाद पूरे मकान पर बदनामी का दाग लग गया। उन्होंने कई प्रॉपर्टी डीलरों से संपर्क किया, लेकिन कोई खरीदार तैयार नहीं हुआ। उनका आरोप है कि लोग मकान को हत्या से जोड़कर देखते हैं और परिवार से भी दूरी बना चुके हैं।
इकलौता बेटा खोया, अब गांव लौटने की इच्छा
ओमपाल की जिंदगी पहले भी दुखों से गुजरी है। उनका इकलौता बेटा महज 25 साल की उम्र में चल बसा था। इसके बाद उन्होंने कारोबार बंद कर दिया और मकान के किराए से पत्नी के साथ गुजारा करने लगे। अब बीमारी और उम्र के इस पड़ाव पर उनकी परेशानी और बढ़ गई है। वह शुगर, बीपी और दिल की बीमारी से पीड़ित होने के साथ आंखों की रोशनी कम होने की समस्या भी बताते हैं।
रिश्तेदारों ने भी बना ली दूरी
ओमपाल कहते हैं कि इस घटना के बाद रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों ने भी दूरी बना ली। अब उनकी इच्छा सिर्फ इतनी है कि मकान का बंद हिस्सा खुले, वे उसे बेच सकें और अपने गांव लौट जाएं। जिस घर को उन्होंने बुढ़ापे का सहारा समझा था, आज उसी घर की चाबी के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है।



