
नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद हैं। रुबियो की इस यात्रा में भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते और रूस से तेल खरीदने का मुद्दा अहम एजेंडे में शामिल है। इस दौरे पर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और रणनीतिक सहयोग को लेकर चर्चा पर नजर रहेगी।
मंगलवार को रुबियो के मुंबई पहुंचने की खबर के बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की संभावनाओं पर भी चर्चा तेज है। रुबियो ने इससे पहले संकेत दिया था कि समझौता अंतिम चरण के करीब है।भारत दौरे से पहले रुबियो ने कहा, ‘हम इस समय भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं।’
इस साल रुबियो की दूसरी भारत यात्रा
इस साल रुबियो की यह दूसरी भारत यात्रा है। अमेरिकी विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है। इससे पहले मई में अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी तथा ‘क्वाड’ देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया था।
जयशंकर से मुलाकात करेंगे रुबियो
मंगलवार दोपहर मुंबई में जयशंकर और रुबियो के बीच होने वाली बैठक में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होने की उम्मीद है। जयशंकर से मुलाकात के अलावा रुबियो का मुंबई में 26/11 आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए ताज स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करने का भी कार्यक्रम है। इस हमले में 160 से अधिक लोगों की जान गई थी जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। अमेरिका के शीर्ष राजनयिक अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक स्वागत समारोह में भी शामिल होंगे।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर क्या बोले रुबियो
रुबियो ने कहा, ‘हम अभी भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं। इसलिए जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या इस तरह के अन्य मामलों पर कोई फैसला लेते हैं तो हम इन बातों को भी ध्यान में रखते हैं।’उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ महीनों में हमें प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी क्योंकि उनका असर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ रहा था। हमें इन सभी कारकों का संतुलन बनाना होता है। हम इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं और इसके काफी करीब हैं। यही वे पहलू हैं, जिन पर राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या इसी तरह के फैसले लेते समय विचार करते हैं। प्रत्येक देश के सामने अलग-अलग और जटिल परिस्थितियां होती हैं। भौगोलिक वास्तविकताएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। कुछ देशों के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच बनाना बेहद कठिन होता है। यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन विदेश नीति बनाते समय इन सभी बातों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।’



