राजनीतिक

केजरीवाल का बरी होना एजेसियों पर कितना बड़ा सवाल? विश्लेषकों ने बताया इसका सियासी मायने

कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति घोटाले में आरोप मुक्त कर दिया है। कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट को खारिज कर दिया। इसी को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

इस हफ्ते जिन मुद्दों की सबसे ज्यादा चर्चा रही उनमें दिल्ली का कथित शराब नीति घोटाला रहा। राउज एवेन्यू कोर्ट ने बीते शुक्रवार को दिल्ली शराब नीति घोटाले में सीबीआई की चार्जशीट को खारिज कर दिया है। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को आरोप तय करने से इनकार करते हुए बरी कर दिया। अदालत ने सीबीआई के आरोपों को अपर्याप्त, विरोधाभासी और बिना ठोस सबूतों के बताते हुए जांच एजेंसी की साजिश थ्योरी को कमजोर करार दिया। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।

अनुराग वर्मा: कोर्ट में इनके पास बड़े से बड़ा वकील था। बड़ी सी बड़ी दलीलें दी गईं। मैं ये नहीं कह रहा है कि अरविंद केजरीवाल बेईमान हैं, लेकिन मैं ये भी नहीं कह रहा कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें ईमादारी का ठप्पा लगा दिया है। अरविंद केजरीवाल ने भारतीय राजनीति को गिरावट के नए आयाम दिए हैं। अरविंद केजरीवाल जी जो बोलते रहे हैं वो उसका उल्टा करते रहे हैं।

पूर्णिमा त्रिपाठी: शुरुआती चार्ज सीट लाकर अरविंद केजरीवाल का नाम जोड़ा गया। मनीष सिसोदिया को 18 महीने जेल में रखा गया। चुनाव से पहले केजरीवाल को जेल भेजा गया। ये सारी बातें विपक्ष आरोपों को सही बताते दिखती हैं। कोर्ट ने कहा कि ये केस चार्जशीट दायर करने के स्थिति को भी मीट नहीं करता है।

अवधेश कुमार: केस की जिरह से पहले ही आरोप पत्र को ही खारिज किया जाना प्रणालिगत खामी को दिखाता है। न्यायालय ने सीबीआई के सारे सिद्धांत को रिजेक्ट कर दिया है। आगे इस पर बहस होगी। सीबीआई की समस्या यह है कि जितने बड़े केस होते हैं उसमें सीबीआई की क्या स्थिति होती है ये पहले भी देखा गया है। कॉमनवेल्थ, टूजी से लेकर आरुषी तक के मामले में ये चीजें देखी गई हैं। यह फैसला सीबीआई के तरीके पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

राकेश शुक्ल: अरविंद केजरीवाल का दोषमुक्त होना क्या उन आरोपों को बल नहीं देता कि सीबीआई सत्ताधारी दलों के इशारे पर काम करता है। भले सत्ता में कोई भी दल हो। अब आने वाले चुनावों में अरविंद केजरीवाल पूरी बांह खींचकर खड़े होंगे। जिन राज्यों में चुनाव होना है, वहां आम आदमी पार्टी जिन हालात में खड़ी है, उन राज्यों में वह कांग्रेस के लिए ही नुकसानदायक होंगे।  गोवा, गुजरात और पंजाब इसमें शामिल हैं।

विनोद अग्निहोत्री: बोफोर्स से शुरू करिए और अरविंद केजरीवाल के शराब घोटाले तक जितने भी हाईप्रोफाइल घोटाले रहे उनका हश्र क्या रहा देखा जा सकता है। ये मामला कोई नया नहीं है। इससे विपक्ष के आरोप को बल मिलता है कि ये सिर्फ पॉलिटिकल वेंडेटा है। पहले कांग्रेस पर आरोप लगते थे, एजेंसियों का दुरुपयोग करने का अब वही भाजपा पर लग रहे हैं।

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