विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 में श्रमिकों की सेवा सुरक्षा एवं सरकारी वितरण कंपनियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग



अखिल भारतीय विद्युत मजदूर महासंघ ( सम्बद्ध भारतीय मजदूर संघ) के महामंत्री श्री डी. राजमुरुगन ने केंद्रीय विद्युत मंत्री, भारत सरकार को पत्र लिखकर प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव एवं चिंताएँ व्यक्त की हैं।
उन्होंने कहा कि विद्युत क्षेत्र देश की एक अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा एवं आधारभूत संरचना है, इसलिए किसी भी प्रकार के सुधार लागू करते समय श्रमिकों की सेवा सुरक्षा, उपभोक्ताओं के हित तथा सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
महासंघ ने विशेष रूप से विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 133 के अंतर्गत सरकार, प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाले त्रिपक्षीय समझौते को सभी राज्यों में अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की है, ताकि कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन अधिकारों एवं रोजगार सुरक्षा की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि देश के प्रत्येक राज्य अथवा प्रमुख क्षेत्र में कम से कम एक सरकारी स्वामित्व वाली वितरण कंपनी (DISCOM) का होना अनिवार्य किया जाए, जिससे निजी क्षेत्र के एकाधिकार की स्थिति उत्पन्न न हो तथा उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
महासंघ का मत है कि विद्युत पारेषण अवसंरचना देश की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता की रीढ़ है, इसलिए इसका स्वामित्व एवं नियंत्रण सरकार के पास ही रहना चाहिए। निजी भागीदारी को केवल निर्माण या संचालन तक सीमित रखा जा सकता है।
अखिल भारतीय विद्युत मजदूर महासंघ ने सरकार से आग्रह किया है कि प्रस्तावित विधेयक पर विचार करते समय कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, रोजगार की निरंतरता, पेंशन अधिकारों की रक्षा तथा कर्मचारी संगठनों के साथ पारदर्शी संवाद सुनिश्चित किया जाए।
महासंघ के मीडिया प्रभारी श्री रमेश नागर ने बताया कि यदि केंद्र सरकार इन जायज मांगों एवं सुझावों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो महासंघ द्वारा आगे धरना, प्रदर्शन एवं व्यापक आंदोलन करने पर विचार किया जाएगा।
रमेश नागर
मीडिया प्रभारी
अखिल भारतीय विद्युत मजदूर महासंघ (ABVMMS)



