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पूज्य भन्ते प्रियबोधि  की करुणा बुद्ध विहार में धम्मदेशना प्रकृति ही ईश्वर है – भन्ते प्रियबोधि


महाराष्ट्र के ताडोबा अभयारण्य मे स्थित संघाराम वर्तमान नाम रामदिघी से तुलसी नगर के करुणा बुध्द विहार में पधारे पूज्य भन्ते प्रियबोधि जी ने उपस्थित उपासक- उपासिकाओ को त्रिशरन पंचशील ग्रहण कराया। इस अवसर पर धम्म देशना देते हुए उन्होंने कहा कि आज इन्सान ईश्वर की खोज कर रहा है, जबकि प्रकृति ही ईश्वर है, क्योकि हमें प्राणवायु से लेकर जीवित रहने तक की सभी चीजे, जैसे, अनाज, पानी, प्रकाश, आदि इसी प्रकृति से प्राप्त होती है। उन्होने कहा कि सिध्दार्थ गौतम एक राजकुमार हो तो हुए भी उनका जन्म खुले आसमान के नीचे प्रकृति में हुआ पूरा जीवन प्रकृति में ही बिताया और उन्हे इसी प्रकृति में ज्ञान की प्राप्ति हुई और सम्यक समबुध्द हो गये। साथ ही उनका महापरिनिर्वाण भी खुली प्रकृति में होकर वह अर्हंत हो गये।
पूज्य भन्ते जी ने कहा कि इन्सान के कर्म और विचार अच्छे होना चाहिए और अच्छे विचार के लिए निस्वार्थ दान पारामिता की भावना होना चाहिए तभी वह इन्सान अपना जीवन सार्थक कर सकता है। कोई भी पूण्य कर्म करने से पहले संकल्पित होकर अधिष्ठान कर मन को अंदर से स्वच्छ और निर्मल करना चाहिए, तभी आपके मन मे दुसरों के प्रति प्रेम और करुणा जागृत होगी और आप उसकी भलाई के लिए ही सोचोगे। आपके मन मे किसी के प्रति कोई दुर्भावना नही रहेगी और आप हमेशा प्रफुल्लित रहेंगे। धम्मदेशना के पश्चात प्रबुध्द महिला मंडल व्दारा पूज्य भन्ते जी को धम्मदान दिया गया।
इस अवसर पर दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के ट्रस्टी एवं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष इजि धम्मरतन सोमकुवर, प्रदेश उपाध्यक्ष वामन जंजाले, प्रदेश महासचिव चिंतामन पगारे, समता सैनिक दल के प्रदेश संरक्षक यू जी चवरे, जिला अध्यक्ष मनोज माणिक, जिला उपाध्यक्ष ए आर आनंद, महासचिव अशोक पाटील, सचिव संजय पाटिल, कोषाध्यक्ष चिंतामन गजभिये, राजू गेडाम, अशोक गेडाम, संयुक्त जयंती समारोह के अध्यक्ष रामू गजभिये, लिलाधर शेंडे, एन डी रंगारी, प्रबुध्द महिला मंडल की अध्यक्ष अंजली चवरे, महासचिव कल्पना माणिक, कोषाध्यक्ष कविता गेडाम, नीता रामटेक, मंजूषा वासे, सुजाता सोमकुंवर, पुष्पलता गेडाम, वंदना गजभिये, सिंधु शेंडे, ज्योति कडबे सहित बडी संख्या में उपासक और उपासिकाये उपस्थित थे।

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