अध्यात्मखबरमध्य प्रदेश
आज के दौर की दैनिक क्रियाएं भोग और संभोग पर टिकी हुई हैं
मां चामुंडा दरबार के गुरु जी ने पत्नियों द्वारा पतियों की हत्या और सामाजिक विघटन पर रखी राय


भोपाल । मां चामुंडा दरबार के गुरु राम सजीवन दुबे ने आज के सामाजिक विघटन और पतियों द्वारा पत्नियों की हत्या तथा पत्नियों द्वारा पतियों की हत्या पर अपनी राय रखी । गुरु जी ने कहा कि यदि किसी ज्योतिषी से आप पूछेंगे तो वह कहेगा कलयुग है। लेकिन इस युग में भी वही है जो सतयुग में था उसी तरह दिन रात हो रहे हैं इस तरह चांद सूरज उग रहे हैं । आज की दैनिक क्रियाएं भोग और संभोग हो गई हैं ।हमारी प्रकृति ऐसी बन गई है की मर्यादा नहीं बची है । बहन जी लोग की सास- ससुर के सामने ही पति से कह देती है कि चलो सोने का समय हो गया है । हमारी जमाने में कभी ऐसा नहीं होता था। जब तुम अपनी मां के नहीं हुए तो बच्चे की मां कैसे तुम्हारी हो गई। पत्नी को सिर पर चढ़ा लेना कि मैं तुम्हारे लिए चांद- तारे तोड़ लाऊंगा, चढ़ाया तुमने तो सजा भी तुम्हें ही भुगतनी पड़ेगी।



