सर्किल रेट बढ़ाना समाधान नहीं, वैल्यूएशन फिलॉसफी में सुधार जरूरी: क्रेडाई
गाइडलाइन नीति को मार्केट रियलिटी से जोड़ा जाए: मनोज मीक
भोपाल जिला पंजीयक कार्यालय की 23 मार्च 2026 की प्रेस विज्ञप्ति से यह स्पष्ट है कि गाइडलाइन 2026–27 के मसौदे पर प्राप्त 63 सुझावों में से 34 को आंशिक रूप से, 4 को पूर्ण रूप से स्वीकार किया गया, 22 को अमान्य माना गया और 3 महत्वपूर्ण सुझाव जो शासन अथवा केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के स्तर से जुड़े हैं आगे भेजे गए हैं। इसी विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि कुल 2177 कंडिकाओं में लगभग 66 प्रतिशत में कोई वृद्धि प्रस्तावित नहीं है, जबकि लगभग 740 कंडिकाओं में वृद्धि प्रस्तावित है।
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारी स्पष्ट राय है कि यह मामला अब केवल लोकल संशोधन का विषय नहीं रह गया है। अब ज़रूरत इस बात की है कि केंद्रीय स्तर पर गाइडलाइन निर्धारण की पूरी प्रोसेस को अधिक साइंटिफिक, ट्रांसपेरेंट और प्रैक्टिकल बनाया जाए। क्रेडाई भोपाल ने अपने 12 मार्च 2026 के प्रतिवेदन में साफ कहा है कि गाइडलाइन एक गाइडिंग प्रिंसिपल है, इसे हर परिस्थिति में एबसोल्यूट मानकर लागू नहीं किया जाना चाहिए। इसी कारण हमने रेंज-बेस्ड गाइडलाइन, री-ट्रांसफर पर स्टाम्प ड्यूटी एडजस्टमेंट, कृषि भूमि पर अप्राकृतिक उपबंधों का युक्तिकरण, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में फ्लोर-वाइज यथार्थवादी दरें, ग्रीन बेल्ट, नदी-नाले, जलाशय और एफटीएल किनारे उपयोग-प्रतिबंधित भूमि के लिए अलग राहत, लंबित एग्रीमेंट आधारित संपत्तियों हेतु सीमित अवधि की एमनेस्टी स्कीम, तथा कम-से-कम 3 वर्ष की स्टेबिलिटी पीरियड जैसे सुझाव दिए हैं।
मीक ने आगे बताया कि क्रेडाई इंदौर की अपने ज़िले में प्रस्तुत आपत्तियाँ भी यही बताती हैं कि पूरी प्रक्रिया 2018 के नियमों की भावना के अनुरूप, पूरी बेस-मटेरियल के साथ और वास्तविक लैंड-यूज़ को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। वहाँ यह गंभीर आपत्ति दर्ज की गई है कि पर्याप्त पंजीकृत दस्तावेजी आधार के बिना 10 प्रतिशत से 133 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित कर दी गई, एपेंडिक्स सार्वजनिक नहीं किए गए, और कुछ चुनिंदा ऊँची रजिस्ट्रियों के आधार पर पूरी कॉलोनी या प्रोजेक्ट की दरें बढ़ाने का प्रयास किया गया। यह भी कहा गया है कि ग्रीन या लो-डेंसिटी लैंड का वैल्यूएशन उसके वास्तविक उपयोग के आधार पर होना चाहिए। इसलिए क्रेडाई का मानना है कि अब समय केवल रेट बढ़ाने या घटाने का नहीं, बल्कि पूरी वैल्यूएशन फिलॉसफी को सुधारने का है। राजस्व का टिकाऊ आधार बढ़े हुए रेट नहीं, बल्कि बढ़ा हुआ वैध वॉल्यूम है। यदि सरकार सचमुच ट्रांसपेरेंसी, अफोर्डेबिलिटी, इन्वेस्टमेंट कॉन्फिडेंस और वैध ट्रांजैक्शंस बढ़ाना चाहती है, तो गाइडलाइन नीति को मार्केट रियलिटी, लैंड-यूज़, यूज़ेबिलिटी और पब्लिक इंटरेस्ट से जोड़ना ही होगा।



