करुणा बुध्द विहार में बुध्द वंदना के पश्चात महान चक्रवर्ती राजा अशोक सम्राट की जयंती पर्व पर दिया प्रबोधन


करुणा बुध्द विहार, तुलसी नगर भोपाल में प्रति रविवार होनेवाली सामूहिक बुध्द वंदना के पश्चात महान चक्रवर्ती राजा सम्राट अशोक जी की जयन्ती पर्व पर दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के ट्रस्टी एवं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष इंजि.धम्मरतन सोमकुंवर जी ने प्रबोधन देते हुए बताया कि महान चक्रवर्ती राजा सम्राट अशोक कलिंग युध्द के दौरान युध्द की विभिक्षिका को देखकर उनका मन द्रवित होकर कैसे करुणा मे परिवर्तित हो गया और बुध्द के धम्म को अंगीकार कर उस पथ पर चलना प्रारंभ किया।
वे बुध्द धम्म से इतना प्रभावित हुये कि उन्होने देश दुनिया में चौरसी हजार स्तूपों का निर्माण कराया था, जो आज भी पुरातत्व विभाग व्दारा किये जा रहे उत्खनन में प्रमाण स्वरुप निकल रहे है। इसके अलावा उनकी पुत्री संघमित्रा और पुत्र महेन्द्र ने भी अपना पूरा जीवन धम्म कार्य के समर्पित किया। विशेषकर राजा सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा ने भारत देश से बोधिवृक्ष का शाखा श्रीलंका ले जाकर वहा बुध्द धम्म को स्थापित किया गया, आज भी श्रीलंका बौध्द राष्ट्र के रुप में जाना जाता है। सोमकुंवर जी ने बताया कि बुध्द धम्म के प्रचार प्रसार के साथ उसके उत्थान मे महान चक्रवर्ती राजा सम्राट अशोक का बहुत बडा योगदान रहा है।
इस अवसर पर दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया एवं प्रबुद्ध महिला मंडल की पदाधिकारी, सदस्य के साथ साथ बडी संख्या उपासक उपासिकाये उपस्थित थे।



