वीआईटी विश्वविद्यालय मामले में NHRC सख्त — यूजीसी चेयरमैन और मप्र उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव को नोटिस
एनएसयूआई की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की बड़ी कार्रवाई, 2 सप्ताह में मांगा जवाब


भोपाल – राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ( वीआईटी ) विश्वविद्यालय के प्रकरण में बड़ी कार्यवाही करते हुए। आयोग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नई दिल्ली के चेयरमैन एवं मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में प्रकरण में अग्रिम विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी।
मध्यप्रदेश एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार द्वारा की गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मानव अधिकार आयोग ने प्रकरण दर्ज किया था शिकायत में बताया गया था कि सीहोर जिले में संचालित VIT Bhopal University के द्वारा भ्रामक प्रस्तुतीकरण, छात्रों के अधिकारों एवं अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि विश्वविद्यालय द्वारा “भोपाल” नाम का उपयोग किए जाने से अन्य राज्यों के छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों में भ्रम की स्थिति निर्मित होती है तथा प्रवेश प्रक्रिया के दौरान भौगोलिक स्थिति को लेकर भ्रामक धारणा बनती है।
रवि परमार द्वारा शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में व्यवस्थागत कमियों, मूलभूत सुविधाओं की स्थिति एवं पूर्व में सामने आए विवादों की भी शिकायत के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसर में संचालित कथित अवैध क्लीनिक एवं अन्य अनियमितताओं के संबंध में भी पूर्व में विस्तृत शिकायतों को भी आधार बनाया गया था। जिन पर अपेक्षित कठोर कार्यवाही अब तक नहीं हुई है। आयोग ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित संवैधानिक एवं शासकीय प्राधिकारियों से जवाब तलब किया है।
भोपाल एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने बताया कि पूर्व में छात्र-छात्राओं द्वारा व्यापक स्तर पर जंगी प्रदर्शन किया जा चुका है। उस दौरान परिसर में भारी आक्रोश की स्थिति निर्मित हो गई थी, जिसमें आगजनी, तोड़फोड़ जैसी गंभीर घटनाएं भी सामने आई थीं। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी, अव्यवस्थित प्रबंधन एवं शिकायतों पर समय पर कार्रवाई न किए जाने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। यह घटनाक्रम प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना था, जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए।
अक्षय तोमर ने कहा कि यह कार्रवाई छात्रहित एवं पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि संबंधित संस्थाओं द्वारा जवाबदेही से बचने का प्रयास किया गया तो एनएसयूआई प्रदेशव्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी , छात्रों के अधिकारों, पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था एवं जवाबदेह प्रशासन के लिए संगठन निरंतर संघर्षरत रहेगा।



