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ट्रंप को धमकी देने के आरोप में फंसे एफबीआई के पूर्व प्रमुख, ट्रंप बोले- जेम्स कोमी बुरे और भ्रष्ट आदमी हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एफबीआई के पूर्व प्रमुख जेम्स कोमी पर बुधवार को तीखा हमला बोला और जेम्स कोमी को बुरा और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी बताया। जेम्स कोमी, डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की कथित धमकी देने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। जेम्स कोमी ने एक रहस्यमयी पोस्ट किया था, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप को धमकाने के तौर पर देखा जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘अगर कोई भी अपराध के बारे में जानता है तो उन्हें पता होगा कि 86 का मतलब क्या होता है। इसे अपराध की भाषा में हत्या करने के तौर पर देखा जाता है। आपने फिल्मों में देखा होगा कि अपराधी अपने सहयोगियों से किसी के लिए कहते हैं कि उसकी हत्या कर दो और इसके लिए 86 नंबर का इस्तेमाल करते हैं।’ ट्रंप ने कहा कि उनकी जान खतरे में थी और जेम्स कोमी जैसे लोग खतरनाक हो सकते हैं। जेम्स कोमी एक बुरे और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी हैं। उन्होंने चुनाव में धोखाधड़ी की। उन्होंने हिलेरी क्लिंटन की मदद की।

कोमी पर ट्रंप को धमकी देने का है आरोप
जेम्स कोमी, अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं और साल 2017 में ट्रंप ने उन्हें पद से हटा दिया था। बीते साल मई में जेम्स कोमी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में पत्थरों की एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें पत्थरों को इस तरह से रखा गया था कि वे ’86 47′ नंबर दर्शा रहे थे। इसे राष्ट्रपति ट्रंप को जान से मारने की धमकी माना गया। आपराधिक और कानूनी जगत में 86 नंबर को हत्या करने के कोडवर्ड के रूप में जाना जाता है। वहीं 47 को डोनाल्ड ट्रंप से जोड़ा जा रहा है क्योंकि वे अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति हैं। हालांकि जेम्स कोमी ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वे निर्दोष हैं और उन्हें किसी का डर नहीं है। कोमी ने न्याय विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि न्याय विभाग ऐसे काम नहीं करता।

जेम्स कोमी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई उत्तरी कैरोलिना में हो रही
इसी पोस्ट के लिए अमेरिका के न्याय विभाग ने जेम्स कोमी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिसकी सुनवाई उत्तरी कैरोलिना की संघीय अदालत में हो रही है। राष्ट्रपति को धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद बुधवार को जेम्स कोमी ने आत्मसमर्पण कर दिया। हालांकि 10 मिनट सुनवाई के बाद उन्हें जाने दिया गया। फिलहाल अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तय नहीं की है।

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