

वॉशिंगटन में अमेरिकी संसद के भीतर इन दिनों वैश्विक रणनीतिक संतुलन को लेकर गंभीर बहस चल रही है। सांसदों ने चिंता जताई है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति को प्रभावित कर सकती है। यह चर्चा उस समय हो रही है जब अमेरिका एक साथ कई मोर्चों पर सैन्य और कूटनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिकी सांसदों ने पेंटागन बजट सुनवाई के दौरान कहा कि चीन अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहा, बल्कि वह तेजी से वैश्विक सैन्य ताकत के रूप में उभर रहा है। चीन लगातार अपने नौसैनिक बेड़े, मिसाइल तकनीक और अंतरिक्ष क्षमताओं में निवेश बढ़ा रहा है, जिससे प्रशांत महासागर में शक्ति संतुलन बदल रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव का असर
सांसदों ने यह भी चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ने से हिंद-प्रशांत में तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता कमजोर हो सकती है। उनका कहना है कि अगर अमेरिका का ध्यान इस क्षेत्र से हटता है, तो चीन को अपना प्रभाव बढ़ाने का और अवसर मिल सकता है। सुनवाई में समिति अध्यक्ष माइक डी. रोजर्स ने कहा कि अमेरिका इस समय अभूतपूर्व वैश्विक खतरे का सामना कर रहा है, जिसमें चीन सबसे बड़ा चुनौतीकर्ता है। वहीं जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने कहा कि सैन्य तैनाती हमेशा जोखिम और प्राथमिकताओं के आधार पर संतुलित की जाती है।
रणनीतिक संतुलन की चुनौती
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सरकार की रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया भर में एक साथ कई खतरों से निपटने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीति का उद्देश्य तात्कालिक सुरक्षा और दीर्घकालिक रोकथाम दोनों को संतुलित रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह मिडिल ईस्ट और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में समान रूप से प्रभाव बनाए रखे। इसी बीच चीन की बढ़ती गतिविधियां वैश्विक शक्ति संतुलन को तेजी से बदल रही हैं।

