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कैबिनेट के निर्णय के बाद जारी आदेश और उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन नहीं करने पर भोपाल में पंचायत सचिवों का धरना सम्पन्न

सरकार पंचायत सचिवों की उपेक्षा की बजाय मांगों को पूरा करे- दिनेश चंद्र शर्मा

सरकार, मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और मंत्री अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन प्रस्तुत किये

भोपाल। मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन द्वारा प्रदेश अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में अंबेडकर ग्राउंड पर  6 सूत्रीय मांगों को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया।  पंचायत सचिवों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध स्वरूप डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को ज्ञापन सौंपा। दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि बीते ढाई वर्षों से मध्यप्रदेश का प्रत्येक पंचायत सचिव वादा खिलाफी सार्वजनिक अपमान का शिकार होता आया है।   सरकार और विभाग में बैठे उन जवाब देहियों को आज धरना देकर यह अहसास कराया जायेगा कि प्रदेश की सरकार 30 महीने में अपनी ही कैबिनेट के निर्णय में जारी आदेश का क्रियानायन एवं उच्च न्यायालय के निर्णयों पर अमल नहीं किया गया तो यह पंचायत सचिवों के साथ घोर अन्याय है।

उक्त आशय की जानकारी आज राजधानी के भोपाल अम्बेडकर मैदान में आयोजित धरने से देते हुए, संगठन के प्रदेश अध्यक्ष  दिनेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, अपर मुख्य सचिव को मांगों पर चर्चा, ज्ञापन और एक सैकड़ा पत्र दिये गये लेकिन समय देने की बजाय झूठा आश्वासन और मिलने का समय तक नहीं दिया गया है। आज प्रदेश के पंचायत सचिव भारी आक्रोश में है।

एक दिवसीय धरने के दौरान मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन की ओर से मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन देकर मांग की गई है कि समय रहते 6 मांगों पर निराकरण नहीं किया गया वो संगठन बड़े आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।

मुख्य मांगे इस प्रकार है।

1. मुख्यमंत्री की घोषणा के परिपालन में केबिनेट द्वारा जारी आदेश समयमान वेतनमान का लाम पंचायत सचिवों को 30 माह बाद नहीं मिला और ना ही क्रियान्वयन किया गया, आदेश दिनांक से एरियर सहित समयमान वेतनमान भुगतान किया जावे।

2. उच्च न्यायालय मुख्य सीट जबलपुर एवं खण्डपीठ उच्च न्यायालय इन्दौर व ग्वालियर द्वारा पंचायत सचिवों की सेवाकाल की गणना नियुक्ति दिनांक से करने के 5 आदेश जारी किये गये है अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के 10 माह बाद भी पालन नहीं किया गया है। वर्ष 2013 के वेतन निर्धारण आदेश में सेवाकाल की गणना नियुक्ति दिनांक से की जाये एवं 2013 से 2026 के अंतर एरियर राशि प्रदान की जाए।

3. सरकार द्वारा 04 अगस्त 2023 को प्रदेश के पंचायत सचिवों को शासकीय कर्मचारियों की भांति समस्त सुविधाएं देते हुए, विभाग में संविलियन करने की घोषणा की गई थी लेकिन आज दिनांक तक पंचायत सचिवों के विभाग में संविलियन की कार्यवाही नहीं की गई है। जिससे पंचायत सचिवों का भविष्य अधर में है प्रदेश के 23 हजार पंचायत सचिवों का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संविलियन किया जावे।

4. वर्ष 2025 में जारी किये गये प्रथम राजपत्र प्रकाशन पर दावा आपत्ति में 5600 आपत्तियाँ दर्ज किये जाने के बाद भी 2026 में विसगंतिपूर्ण अर्जित अवकाश विलोपित करते हुए, नया राजपत्र प्रकाशित कर दिया गया है। पुनः संशोधन कर, पंचायत सचिव सेवा भर्ती नियम राजपत्र में अर्जित अवकाश का प्रावधान किया जाये।

5. प्रदेश में अनुकम्पा आश्रित लम्बे समय से दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है अनुकम्या आश्रितों के सैकड़ों प्रकरण पंचायत राज संचालनालय एवं जिलों में लम्बित है जिसमें मुख्य रूप पिछड़ा वर्ग के आवेदक प्रताड़ित व परेशान है। संगठन की सरकार से मांग है कि जिस संवर्ग का पंचायत सचिव दिवंगत हुआ है उसी वर्ग पर उसकी नियुक्ति की जाये। लेकिन रोस्टर आमेलन आदि शर्तों में अनुकम्पा आवेदकों को गुमराह किया जाकर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान नहीं की जा रही है। विभाग द्वारा अभियान चलाकर 100 प्रतिशत अनकम्पा नियुक्ति प्रदान की जाये।

6. मुख्यमंत्री की घोषणा एवं सरकार के निर्णय के पालन में प्रदेश के समस्त पंचायत सचिवों को स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभ की योजना में सम्मिलित किया जावे एवं आयुष्मान कार्ड जारी करने के लिए, विभागीय अभियान प्रारम्भ कर पंचायत सचिवों को लाभ के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना एवं आयुष्मान कार्ड जारी किया जावे।

धरने के दौरान उपरोक्त मांगों को पूरा करने के लिए ज्ञापन मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, अपर मुख्य सचिव, आयुक्त को प्रशासन के माध्यम से एवं संगठन के प्रतिनिधि मण्डल द्वारा प्रस्तुत किये गये। मांगे नहीं माने जाने पर 60 दिवस बाद माह जुलाई में विशाल करो या भरो आंदोलन संगठन द्वारा किये जाने का निर्णय लिया गया।

 

 

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