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उज्जैन के मुस्लिम बाहुल्य बेगमबाग में फिर गरजा बुलडोजर, 5 अवैध बिल्डिंग जमींदोज

सुप्रीम कोर्ट तक से नहीं मिली राहत

उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित बेगमबाग क्षेत्र में मोहन यादव सरकार का बुलडोजर एक बार फिर एक्शन में दिखा। लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद, जैसे ही स्टे खारिज हुआ, उज्जैन विकास प्राधिकरण ने पोकलेन मशीनों के साथ पहुंचकर 5 अवैध बिल्डिंगों को जमींदोज कर दिया। दरअसल, यह पूरा विवाद उज्जैन विकास प्राधिकरण की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। UDA ने बेगमबाग में 45 भूखंड (प्रत्येक 2400 स्क्वेयर फीट) 30 साल की लीज पर केवल आवासीय उपयोग के लिए दिए थे। भूखंड धारकों ने न केवल इन्हें व्यावसायिक बना लिया, बल्कि 45 प्लाटों के टुकड़े-टुकड़े कर 90 इमारतें खड़ी कर दीं।

लीज खत्म: वर्ष 2014-15 में लीज समाप्त हो गई, लेकिन नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसके बाद प्रशासन ने इन अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की।
श्रद्धालुओं के लिए बदला रास्ता

पिछले एक साल में यहां 58 बिल्डिंग तोड़ी जा चुकी हैं। आज हुई कार्रवाई में कोई विरोध नहीं हुआ, क्योंकि भवन मालिकों ने कोर्ट का आदेश आने के बाद खुद ही सामान खाली करना शुरू कर दिया था। सुरक्षा के लिहाज से बेगमबाग मार्ग को वाहनों के लिए बंद रखा गया है, केवल पैदल श्रद्धालु ही यहां से गुजर पा रहे हैं।

माननीय न्यायालय से स्टे खारिज होने के बाद ही यह कार्रवाई की जा रही है। नियमों के विरुद्ध आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक उपयोग किया गया और लीज भी समाप्त हो चुकी थी। सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर यहां ब्रिज निर्माण प्रस्तावित है, जिसके लिए जगह खाली कराना जरूरी था।

सिहंस्थ 2028 की तैयारी

प्रशासन का कहना है कि यह क्षेत्र महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग का अहम हिस्सा है। आगामी सिहंस्थ 2028 के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यहां एक भव्य ब्रिज का निर्माण प्रस्तावित है। इसी विकास कार्य में बाधा बन रहे अवैध निर्माणों को कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया जा रहा है। अब तक 90 में से 63 बिल्डिंग तोड़ी जा चुकी हैं, शेष 27 पर भी जल्द कार्रवाई होगी।

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