इधर ईरान से जंग लड़ते रहे, उधर इस देश का एनरिच्ड यूरेनियम छीन कर अमेरिका ले गए ट्रंप


ईरान का परमाणु कार्यक्रम बंद कराने और उसका यूरेनियम छीनने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी जान लगा रखी है. 6 हफ्ते तक जंग भी लड़ी. पूरी दुनिया में खलबली मचा दी. फिर भी अभी तक ईरान को काबू नहीं कर पाए हैं. ट्रंप एक तरफ ईरान से जंग लड़ते रहे, वहीं दूसरी तरफ एक देश का एनरिच्ड यूरेनियम कब्जा करके अपने देश ले गए. ये देश है वेनेजुएला.
मादुरो को पकड़ने के लिए चलाया था कमांडो ऑपरेशन
वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में एक सीक्रेट ऑपरेशन चलाया था. इसके तहत अमेरिकी कमांडो चुपचाप 3 जनवरी को तड़के करीब 3 बजे वेनेजुएला की राजधानी काराकास में उतरे और सीधे राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के महल में घुस गए. मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क ले गए. इसके बाद वेनेजुएला की कमान डेल्सी रोड्रिग्ज को सौंप दी गई.
छह हफ्ते में ही यूरेनियम अमेरिका ले गए ट्रंप
वेनेजुएला पर धावा बोलने के पीछे ट्रंप का मकसद सिर्फ मादुरो को गिरफ्तार करना ही नहीं था, उनकी नजर वेनेजुएला के एनरिच्ड यूरेनियम पर भी थी. मादुरो की गिरफ्तारी के कुछ महीने बाद, अब ट्रंप ने वेनेजुएला का यूरेनियम चुपचाप निकलवाकर अमेरिका मंगवा लिया है. वैसे तो परमाणु सामग्री को हटाने में कई साल लग जाते हैं, लेकिन ट्रंप को इतनी जल्दी थी कि उन्होंने छह हफ्ते में ही इस मिशन को पूरा करवा दिया.
वेनेजुएला से अमेरिका ऐसे पहुंचा यूरेनियम
- यूरेनियम को वेनेजुएला के रिएक्टर से निकालकर पहले सुरक्षित स्पेंट फ्यूल कंटेनर में रखा गया.
- उसके बाद सड़क के रास्ते से इस कंटनेर को वेनेजुएला के बंदरगाह तक लाया गया.
- बंदरगाह लाने के बाद इस यूरेनियम को खास तौर पर तैयार जहाज में रखवाया गया.
- इस काम में परमाणु सामग्री लाने-ले जाने में एक्सपर्ट यूके के न्यूक्लियर ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशंस के एक्सपर्ट्स की मदद ली गई.
- ये जहाज समुद्र में अपना सफर तय करते हुए मई की शुरुआत में अमेरिका पहुंच गया.
- अब यह यूरेनियम साउथ कैरोलिना में अमेरिकी ऊर्जा विभाग की सवाना रिवर फैसिलिटी में रखवा दिया गया है.
मिशन में IAEA और ये देश शामिल
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (NNSA) के मुताबिक, वेनेजुएला से एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिका तक लाने के मिशन में अमेरिका, वेनेजुएला, यूनाइटेड किंगडम (यूके) के अलावा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संगठन (IAEA) के एक्सपर्ट्स भी शामिल थे.



