खबरमध्य प्रदेश

मानव संग्रहालय में 30 दिवसीय प्रोडक्शन ओरिएंटेड “बाल रंगमंच कार्यशाला “ का शुभारंभ

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 30 दिवसीय “प्रोडक्शन ओरिएंटेड चिल्ड्रन्स थिएटर वर्कशॉप” का शुभारंभ आज संग्रहालय की अंतरंग प्रदर्शनी वीथि संकुल परिसर स्थित सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना एवं अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में बाल प्रतिभागियों, अभिभावकों, रंगकर्मियों एवं कला प्रेमियों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी एवं फ़िल्म अभिनेता तथा निर्देशक श्री राजीव वर्मा, विशिष्ट अतिथि श्री संजय कुमार श्रीवास्तव, निदेशक, मध्यप्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा, और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सूर्य कुमार पाण्डेय(सहायक क्यूरेटर), प्रशासनिक अधिकारी डॉ. पी. शंकर राव तथा कार्यक्रम के संयोजक श्री राजेन्द्र कुमार झारिया , सिने वीडियो अनुभाग के प्रभारी अधिकारी श्री एचबीएस परिहार तथा अन्य संग्रहालय कर्मी रहे । कार्यक्रम के प्रारंभ में उपस्थित अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। स्वागत उद्बोधन देते हुए डॉ. पी. शंकर राव ने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास और संवेदनशीलता के निर्माण का महत्वपूर्ण साधन है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एमपी स्कूल ऑफ़ ड्रामा के डायरेक्टर श्री संजय कुमार श्रीवास्तव ने बच्चों के लिए रंगमंच की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि थिएटर बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक समझ विकसित करता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि रंगमंच बच्चों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और उन्हें जीवन के विभिन्न आयामों को समझने में सहायता करता है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यशाला के दौरान, वे स्वयं बच्चों को अभिनय, संवाद, शारीरिक अभिव्यक्ति, लोक परंपराओं एवं मंचीय तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे । मुख्य अतिथि , प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं फ़िल्म अभिनेता श्री राजीव वर्मा ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि बाल रंगमंच बच्चों के भीतर छिपी सृजनात्मक ऊर्जा को सामने लाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अपने लंबे रंगमंच एवं सिनेमा अनुभव साझा करते हुए कहा कि बच्चों को कला और संस्कृति से जोड़ना समाज के सांस्कृतिक भविष्य को मजबूत बनाना है। उन्होंने प्रतिभागियों को पूरे समर्पण और उत्साह के साथ कार्यशाला में सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सूर्य कुमार पाण्डेय ने कहा कि मानव संग्रहालय सदैव लोक संस्कृति, कला एवं शिक्षा से जुड़े रचनात्मक कार्यक्रमों को बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सहयोग से आयोजित यह कार्यशाला बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण सीखने का अवसर सिद्ध होगी। कार्यक्रम का संचालन अत्यंत प्रभावपूर्ण ढंग से सुश्री स्वेच्छा ठाकुर द्वारा किया गया, जिसमें बच्चों और रंगमंच की संवेदनशीलता को केंद्र में रखते हुए रंगकला की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम के संयोजक श्री राजेन्द्र कुमार झारिया, द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, अभिभावकों एवं आयोजकों एनएसडी, पत्रकार , मीडिया एवं जन संपर्क अधिकारी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि, यह 30 दिवसीय कार्यशाला प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक बच्चों को रंगमंच की बारीकियों से परिचित कराने के साथ-साथ उनकी कल्पनाशक्ति, अभिव्यक्ति क्षमता और सामाजिक समझ को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों कलाकारों द्वारा 10 जून को एक नाट्य प्रस्तुति भी प्रस्तुत की जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button