अध्यात्म

कमला एकादशी तिथि का आरंभ 27 मई को सुबह में 6 बजकर 22 मिनट पर होगा और अगले दिन 28 मई को सुबह में 7 बजकर 22 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी

मलमास या अधिक मास में आने वाली एकादशी का नाम पद्मिनी एकादशी जिसे कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। अधिक मास में आने वाली एकादशी को बहुत ही दुर्लभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,अधिक मास में आने वाली एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत को करने से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं। कमला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के बुरे दिन भी अच्छे दिन में बदल जाते हैं। आइए जानते हैं अधिक मास की पहली एकादशी कमला/ पद्मिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा।

कमला एकादशी 2026 कब ?

पंचांग की गणना के अनुसार, अधिक मास में आने वाली एकादशी यानी कमला एकादशी तिथि का आरंभ 27 मई को सुबह में 6 बजकर 22 मिनट पर होगा और अगले दिन 28 मई को सुबह में 7 बजकर 22 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। ऐसे में कामदा एकादशी का व्रत उदय तिथि के अनुसार, 27 मई को ही रखा जाएगा।

कमला एकादशी 2026 पद्म पुराण में महत्व

पद्म पुराण के अनुसार, कमला एकादशी का व्रत करने वाले स्त्री और पुरुष को कई गुना फल की प्राप्ति होती है। कमला एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी अच्छी होती है। इन दिन भगवान विष्णु के मंत्र जप करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सुबह जल्दी ब्रह्म मुहूर्त में उठे और भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें। पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन घर पर भगवान विष्णु का जप करने से एक गुना फल प्राप्त होता है। जबकि नदी के तट पर दूना, गौशाला में जप करने पर सहस्त्र गुना, अग्निहोत्र गृह में एक हजार एक सौ गुना, शिवजी के मंदिर में , तीर्थ में, तुलसी के समीप लाख गुना फल की प्राप्ति होती है। वहीं, भगवान विष्णु के मंदिर में जप करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है।

कमला एकादशी 2026 पूजा विधि

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर भगवान विष्णु का ध्यान करें। इसके बाद स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करे।
  • इसके बाद अपने घर के पूजाघर में भगवान विष्णु के पास बैठकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। इसपर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • अब देसी घी का दीपक जलाएं और धूप जलाएं। अब भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • अब भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें और फिर एकादशी कथा का पाठ करें।
  • अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। अंत में सभी को प्रसाद वितरित करें।

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