मध्य प्रदेश

गूगल बैठक से मध्यप्रदेश के एआई मिशन को नई दिशा: क्रेडाई

नॉलेज एंड एआई सिटी भोपाल को मिले एंकर भूमिका: मनोज मीक

भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गूगल क्लाउड इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठक मध्यप्रदेश के डिजिटल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। बैठक में स्मार्ट गवर्नेंस, क्लाउड तकनीक और एआई आधारित नवाचारों के उपयोग पर चर्चा हुई। राज्य सरकार के आधिकारिक अपडेट के अनुसार कृषि, शिक्षा, वन और महिला एवं बाल विकास जैसे विभागों में एआई आधारित सशक्तिकरण पर काम आगे बढ़ रहा है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में भी भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक संचालन, नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं के लिए एआई सहयोग लिया जा रहा है।क्रेडाई भोपाल का मानना है कि यह बैठक सिर्फ़ विभागीय तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे मध्यप्रदेश की आने वाली एआई पॉलिसी, गवर्नेंस सुधार, स्किलिंग, स्टार्टअप्स और भोपाल की प्रस्तावित नॉलेज एंड एआई सिटी से सीधे जोड़ा जाना चाहिए। राजधानी में 3700 एकड़ में आगे बढ़ रही यह परियोजना ‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान की उस दीर्घकालिक विजन से जुड़ी है, जिसमें भोपाल को शिक्षा, शोध, डेटा, एआई, जीसीसी और गवर्नेंस-टेक के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की बात लगातार रखी गई है। इंदौर में प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्वागत योग्य कदम है, लेकिन राज्य के एआई ढांचे में भोपाल की भूमिका स्वाभाविक रूप से केंद्रीय होनी चाहिए। राजधानी में नीति-निर्माण, प्रशासनिक विभाग, नॉलेज एंड एआई सिटी, नगरीय प्रयोगशाला की संभावनाएँ, मास्टर प्लान, जल-तंत्र, एमपी लॉकर, संपदा, बिल्डिंग परमिशन और नागरिक सेवाओं से जुड़े वास्तविक उपयोग-केस मौजूद हैं। इन पर आधारित एआई गवर्नेंस लैब और गूगल क्लाउड स्किलिंग हब राजधानी भोपाल में बनाया जा सकता है।

देश में एआई की प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। इंडिया एआई मिशन के तहत 38000 से अधिक जीपीयू कॉमन कम्प्यूट सुविधा के लिए ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। गूगल ने विशाखापट्टनम में बड़े एआई हब के माध्यम से कम्प्यूट, डेटा सेंटर, ऊर्जा और फाइबर नेटवर्क को साथ जोड़ने की दिशा दिखाई है। इससे साफ है कि अब तकनीकी विकास की असली दौड़ कम्प्यूट, क्लाउड, डेटा, टैलेंट और भरोसेमंद शासन-प्रयोगों की है।

‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर और क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि गूगल के साथ साझेदारी में भोपाल को बैठक स्थल भर न माना जाए। भोपाल को राज्य की एआई गवर्नेंस राजधानी, नगरीय एआई टेस्टबेड और नॉलेज एंड एआई सिटी के स्थायी एंकर के रूप में विकसित किया जा सकता है। यदि सिंहस्थ 2028, इंदौर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और भोपाल नॉलेज एंड एआई सिटी को एक ही राज्य एआई फ्रेम में जोड़ा गया, तो मध्यप्रदेश देश को स्मार्ट गवर्नेंस का व्यावहारिक मॉडल दे सकता है।

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