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एक्सप्लेनर: मौत के इंजेक्शन दो बार लगने के बावजूद मृत्युदंड पाई महिला जिंदा बची, यह कैसे मुमकिन; अब आगे क्या?

अमेरिका में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बुधवार रात को मृत्युदंड पाई एक महिला की सजा को अंजाम देने में बड़ी गड़बड़ हो गई और उसे एक के बाद एक मौत के इंजेक्शन (लीथल इंजेक्शन) की दो डोज दिए जाने के बाद भी उसकी जान बच गई। जिस महिला क्रिस्टा पाइक की सजा को अंजाम दिया गया था, उस पर 31 साल पहले अपनी एक सहपाठी की हत्या का आरोप लगा था। अलग-अलग अदालतों ने इस मामले में सुनवाई की और आखिरकार टेनेसी राज्य को महिला की मौत की सजा के साथ आगे बढ़ने का आदेश दिया।हालांकि, अब महिला के मौत के इंजेक्शन से बचने के बाद अमेरिका से लेकर पूरी दुनिया में इस मामले की चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, मौत के इंजेक्शन को मृत्युदंड का देने का सबसे आसान तरीका माना जाता रहा है। हालांकि, अब अमेरिका में इस घटना के बाद सजा के तरीके पर सवाल उठने लगे हैं।

 यह प्रक्रिया कैसे काम करती है?

  • कैदी को एक स्ट्रेचर पर बांधा जाता है और उसकी नस में आईवी कैथेटर लगाया जाता है। सिरिंज के जरिए घातक रसायन को सीधे रक्तप्रवाह में पहुंचाया जाता है।
  • घातक रसायन रक्तप्रवाह में पहुंचते ही सेंट्रल नर्वस सिस्टम को पूरी तरह से दबा देता है, जिससे व्यक्ति अचेत हो जाता है।
  • दवा का पर्याप्त स्तर दिमाग के सांस नियंत्रित करने वाले केंद्र को निष्क्रिय कर देता है। इससे सांस लेने की प्रक्रिया रुक जाती है।
  • ऑक्सीजन की कमी और दवा के तेज असर से दिल काम करना बंद कर देता है, जिसे कार्डियोवस्कुलर फेलियर कहते हैं और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
  • अगर पहली खुराक के बाद कैदी की मौत नहीं होती, तो उसे प्रोटोकॉल के तहत बैकअप सिरिंज (दूसरी खुराक) दी जाती है।

    अमेरिकी महिला कैसे इन लीथल इंजेक्शन की दो डोज दिए जाने के बावजूद बच गई? 

    क्रिस्टा पाइक को पेंटोबार्बिटल की एक के बाद एक दो खुराकें दिए जाने के बाद भी वे जिंदा बच गईं, जिसके चलते उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचा गया है। टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने इस घटना की विस्तृत स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं और अंतिम आधिकारिक वजह स्थापित होना बाकी है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने इसके पीछे कुछ आशंकाएं जताई हैं…

    1. नस (आईवी लाइन) की नाकामी
    क्रिस्टा पाइक के वकीलों ने लीथल इंजेक्शन लगाए जाने से पहले ही चेतावनी दी थी कि उनकी नसें बहुत पतली हैं। माना जा रहा है कि प्रक्रिया के दौरान नस फटने या आईवी लाइन सही से न बैठने के कारण दवा सीधे मुख्य रक्तप्रवाह में प्रवेश नहीं कर सकी।

    2. रक्त में दवा का अपर्याप्त स्तर
    एमोरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और मेडिकल एक्सपर्ट डॉ. जोएल जिवोट के मुताबिक, नस में गड़बड़ी की वजह से पेंटोबार्बिटल दवा पाइक के रक्तप्रवाह में उस स्तर तक पहुंच ही नहीं पाई, जो सांस रोकने और कार्डियोवस्कुलर फेलियर पैदा करने के लिए जरूरी होता है।

    3. दवा की गुणवत्ता और क्षमता पर सवाल
    क्रिस्टा पाइक की कानूनी टीम ने यह सवाल भी उठाया कि इस्तेमाल की गई पेंटोबार्बिटल दवा डिग्रेड या अपनी क्षमता खो चुकी हो सकती है, जिससे दो खुराक मिलने के बावजूद क्रिस्टा पूरी तरह अचेत नहीं हुईं।

    4. सरकारी प्रोटोकॉल की सीमा
    टेनेसी राज्य के नियमों के तहत पहली खुराक के विफल होने पर केवल एक बैकअप खुराक (दूसरी सिरिंज) देने का प्रावधान है। जब दोनों खुराक देने के बाद भी पाइक सांस लेती रहीं, खर्राटे भरती रहीं और उनका दिल धड़कता रहा, तो लिखित नियमों में आगे का कोई कानूनी कदम दर्ज नहीं था।

    इसके चलते उनके मृत्युदंड की सजा को रोककर उन्हें तुरंत अस्पताल में आपातकालीन जीवनरक्षक देखभाल के लिए भेजा गया।

    क्या पहले भी लीथल इंजेक्शन से बच गए हैं मृत्युदंड पाए लोग?

    लीथल इंजेक्शन की प्रक्रिया में गड़बड़ी की वजह से कैदियों के जीवित बचने के मामले पहले भी सामने आए हैं, लेकिन क्रिस्टा पाइक का मामला ऐतिहासिक रूप से बिल्कुल अलग है। क्रिस्टा पाइक के मामले से पहले कम से कम सात कैदी ऐसे रहे हैं, जिन्हें लीथल इंजेक्शन देने से पहले इसकी प्रक्रिया को बीच में ही रोकना पड़ा, क्योंकि मेडिकल टीम को दवा देने के लिए उपयुक्त नस नहीं मिल सकी।

    टोनी कारुथर्स (2026)
    टेनेसी में ही मई 2026 में एग्जीक्यूशन टीम एक घंटे से ज्यादा तक कोशिश करने के बाद भी जरूरी बैकअप आईवी लाइन नहीं लगा पाई थी, जिसके बाद मौत की सजा टाल दी गई।

    रोमेल ब्रूम (2009)
    ओहायो में दो घंटे तक नस ढूंढने के प्रयास में नाकाम होने के बाद मौत की सजा का कार्यान्वयन रोक दिया गया था। वह 21वीं सदी में लीथल इंजेक्शन की कोशिश से बचने वाले पहले व्यक्ति बने थे।

    थॉमस क्रीच (2024)
    अमेरिका के इदाहो राज्य में नस न मिलने के कारण प्रक्रिया स्थगित की गई।

    केनेथ स्मिथ और एलन मिलर 
    अलाबामा में लीथल इंजेक्शन के दौरान नसों की समस्या के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। बाद में 2024 में अन्य तरीकों को मौत की सजा के लिए लागू किया गया।।

    डोयले हैम (2018) और अल्वा कैंपबेल
    नसों की पहुंच न मिलने के कारण इनके मृत्युदंड की तारीख टाल दी गई थी और बाद में दोनों की प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हुई।

    क्रिस्टा पाइक का मामला क्यों अलग?
    डेथ पेनाल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर (डीपीआईसी) के मुताबिक, घातक दवा की खुराक पेंटोबार्बिटल शरीर में दिए जाने के बाद भी किसी कैदी का जीवित बच जाना अभूतपूर्व और अनूठा मामला है। पूर्व के सभी मामलों में निष्पादन टीम दवा दिए जाने से पहले ही नस न मिलने पर रुक गई थी। क्रिस्टा पाइक पहला ऐसा मामला है जहां प्रोटोकॉल के तहत घातक दवा की दो पूरी खुराकें (दोनों सिरिंज) दिए जाने के बाद भी कैदी जीवित रहा।

    मृत्युदंड की सजा पाया कोई व्यक्ति अगर इससे बच जाता है तो उसकी सजा का क्या होगा?

    अगर मृत्युदंड पाए किसी व्यक्ति को सजा देने के दौरान कुछ गड़बड़ी हो जाती है या कोशिश विफल हो जाता है और वह बच जाता है, तो उसकी सजा और कानूनी स्थिति भी असर पड़ता है।

    मृत्युदंड की सजा खुद समाप्त नहीं होती 
    मौत की सजा का एग्जीक्यूशन नाकाम होने या इस्तेमाल किए गए तरीके में गड़बड़ी आने से कैदी की मूल मृत्युदंड की सजा कानूनी रूप से रद्द या खत्म नहीं होती है। कैदी कानूनी तौर पर डेथ रो यानी मौत की सजा पर ही बना रहता है।

    दोबारा एग्जीक्यूशन का प्रयास
    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 1947 के ऐतिहासिक निर्णय- लुइसियाना एक्स फ्रांसिस बनाम रेसवेबर के मुताबिक, अगर सजा का कार्यान्वयन किसी मशीनी गड़बड़ी या अनपेक्षित दुर्घटना के कारण रुका है, तो राज्य दोबारा सजा देने की कोशिश कर सकता है।

    अदालत का मानना था कि एक अनपेक्षित दुर्घटना के बाद दोबारा प्रयास करना डबल ज्योपार्डी यानी एक ही अपराध के लिए दोहरा दंड या क्रूरता नहीं माना जाता।

    ‘क्रूर और असामान्य सजा’ की कानूनी चुनौती
    हालांकि, अमेरिका के सांविधानिक नियमों (संविधान के आठवें संशोधन) के तहत अब क्रूर और असामान्य सजा के खिलाफ अधिकार के तहत अगर एग्जीक्यूशन नाकाम होने के पीछे राज्य के पूरे प्रोटोकॉल या कानून में ही कोई गंभीर दोष पाया जाता है, तो कैदी के वकील इसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं।

    अगर यह साबित होता है कि राज्य की प्रक्रिया बेहद यातना देने वाली या गंभीर जोखिम पैदा करती है, तो अदालत राज्य को उसी तरीके से दोबारा सजा आगे बढ़ाने से रोक सकती है।

 

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