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AI पढ़ाएगा, लेकिन सोचने की ताकत इंसान को ही बढ़ानी होगी, आरएनटीयू में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल और भविष्य पर हुआ मंथन

आरएनटीयू में उच्च शिक्षा में AI के इस्तेमाल, नैतिकता और भविष्य पर हुआ मंथन, विशेषज्ञों ने कहा - AI जवाब देगा, लेकिन सही सवाल पूछना विश्वविद्यालय सिखाएंगे

भोपाल, 12 अक्टूबर 2026। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (RNTU), भोपाल ने संयुक्त रूप से AIU वेस्ट जोन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। सम्मेलन का विषय “उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का रणनीतिक एकीकरण: अवसर, चुनौतियां और प्रभाव” रहा। कार्यक्रम में आरएनटीयू के चांसलर डॉ. संतोष चौबे, प्रो-चांसलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, एसजीएसयू के चांसलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, AIU में रिसर्च डिवीजन के जॉइंट डायरेक्टर डॉ. अमरेंद्र पाणी, मुख्य वक्ता उद्यमी, फ्यूचरिस्ट, लेखक और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर के संस्थापक सृजन पाल सिंह, मध्य प्रदेश शासन के मध्य प्रदेश स्टार्टअप मिशन की एग्जीक्यूटिव हेड डॉ. आभा ऋषि, साइबर विशेषज्ञ अमित दुबे, कुलगुरु प्रो. (डॉ.) आर. पी. दुबे, डॉ. संगीता जौहरी कुलसचिव और वेस्ट जोन कॉन्फ्रेंस के कन्वेनर डॉ. राकेश कुमार, प्रोफ़ेसर एन्ड हेड, सेन्टर फार आईओटी एन्ड एडवांस्ड कम्प्यूटिंग, डिपार्टमेन्ट आफ कम्प्यूटर साईंस एन्ड इंजीनियरिंग समेत कई विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर भी शामिल हुए। सम्मेलन में उद्घाटन सत्र के अलावा तीन तकनीकी सत्र, स्टार्टअप पर पैनल चर्चा और टॉक शो हुआ। इनमें शिक्षण, शोध, मूल्यांकन, संस्थागत संचालन और AI के सामाजिक प्रभावों पर चर्चा हुई।

मध्य प्रदेश शासन के मध्य प्रदेश स्टार्टअप मिशन की एग्जीक्यूटिव हेड डॉ. आभा ऋषि ने कहा कि भारत को AI का इस्तेमाल करने के साथ उसके मौलिक समाधान भी विकसित करने होंगे। उन्होंने तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर आगाह किया। उन्होंने स्टार्टअप्स के लिए सरकारी सहयोग और प्रोटोटाइप सहायता का उल्लेख किया। उनके संबोधन में पांच लाख रुपये तक की सहायता का जिक्र भी आया। उन्होंने मौलिक विचार और बाजार की जरूरत को महत्वपूर्ण बताया।

आरएनटीयू के चांसलर डॉ. संतोष चौबे ने अध्यक्षीय संबोधन दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय की AI मिशन और AI नीति पर चर्चा की। उन्होंने विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार और उत्पादन के केंद्र बनाने पर जोर दिया। अपनी पुस्तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि AI को निर्णय लेने में मदद करनी चाहिए, उन पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने भाषा, विचार और लोकतांत्रिक विमर्श पर AI के प्रभाव से जुड़े नैतिक सवाल भी उठाए। उन्होंने शिक्षा में दर्शन, इतिहास और मानवीय मूल्यों की अहमियत बताई।

उद्घाटन सत्र में AI नीति, मानवीय विवेक और नैतिकता पर जोर

आरएनटीयू की प्रो-चांसलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने डिजिटल बदलाव के दौर में AISECT और आरएनटीयू के विजन और कार्यों पर बात की।

एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के रिसर्च डिवीजन के जॉइंट डायरेक्टर डॉ. अमरेंद्र पाणी ने कहा कि AI अब वास्तविकता बन चुका है। उन्होंने कुंभ में CCTV के जरिए पहचान करने जैसे उपयोगों का उदाहरण दिया। उन्होंने ब्लॉकचेन, पांचवीं औद्योगिक क्रांति और मानव-मशीन सहयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने AI के उपयोग को दिशा देने वाले मजबूत ढांचे की जरूरत बताई।

CII मध्य प्रदेश स्टेट काउंसिल के चेयरमैन और एसजीएसयू के चांसलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को AI टूल्स का इस्तेमाल करना सिखाना चाहिए। उन्होंने क्रिटिकल थिंकिंग, बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढलने और कक्षाओं में AI को शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों तक AI कौशल पहुंचाने की जरूरत भी बताई।

बतौर मुख्य वक्ता उद्यमी, फ्यूचरिस्ट, लेखक और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर के संस्थापक सृजन पाल सिंह ने विश्वविद्यालयों में स्पष्ट AI नीति बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने AI साक्षरता और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को AI से मिली जानकारी की सत्यता परखना सिखाएं। उन्होंने कला, विज्ञान और उद्यमिता के एकीकरण की भी बात कही।

वहीं, आरएनटीयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) आर. पी. दुबे ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रभावी शिक्षण, सीखने की प्रक्रिया और शिक्षा में नैतिक बदलावों के महत्व पर बात की।

तकनीकी सत्रों में शिक्षण, शोध और संस्थागत संचालन पर चर्चा

पहला तकनीकी सत्र ‘AI-Enabled Teaching and Learning’ विषय पर हुआ। Google की आंचल चोपड़ा ने AI टूल्स, AI एजेंट और समस्या समाधान पर बात की। उन्होंने शिक्षण में AI के इस्तेमाल और परीक्षा की कॉपियां जांचने जैसे कार्यों में इसकी मदद का उल्लेख किया। एसजीएसयू के कुलपति और सत्र अध्यक्ष प्रो. डॉ. विजय सिंह ने कहा कि AI को सहायक की भूमिका में रहना चाहिए, हर निर्णय का अंतिम आधार नहीं बनना चाहिए।

डॉ. संजय कुमार ने चिकित्सा और कानून जैसे क्षेत्रों में AI के बढ़ते उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि AI के परिणाम हमेशा पूरी तरह सही नहीं होते। डॉ. रणवीर सिंह ने शिक्षकों की बढ़ती जिम्मेदारियों और AI से मिले परिणामों की जांच करने की जरूरत बताई। AIU के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक ने शिक्षा में बदलाव, शिक्षकों के प्रशिक्षण और विश्वविद्यालयों में ओपन-सोर्स AI मॉडल के उपयोग पर बात की।

दूसरा तकनीकी सत्र ‘AI in Research, Innovation and IPR’ विषय पर आयोजित हुआ। ITDPR, AGU के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) अमिताभ सक्सेना ने ऑनलाइन कक्षाओं के शुरुआती दौर से तुलना करते हुए कहा कि तकनीक के बदलाव के बावजूद शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

IISER भोपाल के डेटा साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. तन्मय बसु ने इमेज क्लासिफिकेशन में कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क (CNN), AI की व्याख्यात्मकता और स्वदेशी AI समाधानों पर चर्चा की। डेलॉइट के डायरेक्टर अमित नाइक ने महाभारत में अर्जुन और कृष्ण का उदाहरण दिया। उन्होंने AI के दौर में मार्गदर्शन और मेंटरशिप के महत्व को रेखांकित किया।

तीसरे तकनीकी सत्र ‘AI, Assessment and Institutional Governance’ में मूल्यांकन, कैंपस संचालन और संस्थागत एकीकरण पर चर्चा हुई। डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, खंडवा के कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण रामेश जोशी ने उच्च शिक्षा में AI के जरिए एकीकरण और संस्थागत बदलाव की संभावनाओं पर बात की।

Eduvantage Pvt. Ltd. के डायरेक्टर डॉ. अभिषेक पंडित ने कहा कि भविष्य में परीक्षाओं का स्वरूप काफी बदलने वाला है। उन्होंने AI के साथ कोर्स आउटकम (CO) और प्रोग्राम आउटकम (PO) को जोड़ने की संभावनाएं बताईं। उन्होंने परिणाम के साथ उसे हासिल करने की प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण बताया।

MANIT भोपाल के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग और सेंटर फॉर AI के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल के. चौरसिया ने AI, मशीन लर्निंग, VLSI और कंट्रोल सिस्टम पर बात की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल जानकारी देने के बजाय उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने AI से तैयार काम में मौलिक विचार की अहमियत बताई।

TCS के क्लाइंट पार्टनर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर प्रशांत राठी ने कैंपस संचालन पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने सामान्य, अलग-अलग समाधानों से एंटरप्राइज AI की ओर बढ़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि AI प्रभावी ERP सिस्टम बनाने में मदद कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को हर क्षेत्र का अच्छा ज्ञान विकसित करने की सलाह दी।

स्टार्टअप में AI की भूमिका पर पैनल चर्चा

सम्मेलन में ‘AI as a Growth Engine for Start-ups’ विषय पर पैनल चर्चा रखी गई। इसका संचालन AIC-RNTU की इन्क्यूबेशन मैनेजर क्रति जैन ने किया। पैनल में Opsight AI Pvt. Ltd. के संस्थापक एवं CEO पुलक रिजवानी, Remote Physios के CEO डॉ. अनंत सिंह और Bright Hustle के CEO श्री विवेक पांडेय शामिल रहे। चर्चा का केंद्र स्टार्टअप्स के विकास में AI की भूमिका, नए समाधान विकसित करने की संभावनाएं और तकनीक को व्यावहारिक व्यवसाय में बदलने जैसे विषय रहे।

साइबर सुरक्षा पर टॉक शो

टॉक शो में साइबर विशेषज्ञ अमित दुबे शामिल हुए। इसमें AI के दौर में साइबर सुरक्षा, डिजिटल जोखिमों और ऑनलाइन सुरक्षित व्यवहार से जुड़े पहलुओं पर चर्चा को केंद्र में रखा गया।

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