मध्य प्रदेश

विदिशा जिले में रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता हुई मजबूत

7 ईएचवी सबस्टेशनों में 120 एमवीएआर क्षमता के 10 कैपेसिटर बैंक संचालित

विदिशा। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा विदिशा जिले की विद्युत पारेषण व्यवस्था में रिएक्टिव पावर कंपनसेशन के लिए 120 एमवीएआर क्षमता के 10 कैपेसिटर बैंक संचालित किए जा रहे हैं। जिले के 7 एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचवी) सबस्टेशनों में उपलब्ध इन कैपेसिटर बैंकों से वोल्टेज प्रोफाइल बेहतर बनाए रखने तथा उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

-विदिशा जिले के 7 सबस्टेशनों में 10 कैपेसिटर बैंक–

विदिशा जिले में 220 केवी के दो सबस्टेशन गंज बासौदा एवं विदिशा तथा 132 केवी के पांच सबस्टेशन सहरवासा, लटेरी, शमशाबाद, ग्यारसपुर और सिरोंज शामिल हैं। इन 7 ईएचवी सबस्टेशनों में कुल 120 एमवीएआर क्षमता के 10 कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। इनके माध्यम से विद्युत प्रणाली को आवश्यक रिएक्टिव पावर सपोर्ट मिलता है, जिससे वोल्टेज स्थिरता बनाए रखने में सहायता मिलती है।

–प्रदेश में 750 कैपेसिटर बैंक संचालित-

एमपी ट्रांसको द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 29 नए कैपेसिटर बैंक स्थापित कर ऊर्जीकृत किए गए हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल 750 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं, जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता 9383.5 एमवीएआर है। यह क्षमता प्रदेश की अब तक की अधिकतम रिएक्टिव पावर मांग 6776 एमवीएआर से लगभग 38 प्रतिशत अधिक है।

-विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में सुधार-

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश शासन की मंशानुरूप उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए एमपी ट्रांसको अपने ईएचवी सबस्टेशनों में आवश्यकता के अनुसार कैपेसिटर बैंक स्थापित कर रही है। कंपनी के 418 सबस्टेशनों में से अधिकांश में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। पुराने सबस्टेशनों में भी जरूरत के अनुसार नए कैपेसिटर बैंक स्थापित किए जा रहे हैं और मौजूदा बैंकों की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

-52 पुराने कैपेसिटर बैंक किए गए प्रतिस्थापित–

एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता टेस्टिंग एम.वाई. मंसूरी ने बताया कि कंपनी ने ऐसे 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों को चिह्नित किया था, जिनकी उपयोगी आयु पूरी हो चुकी थी और जो अपेक्षित कैपेसिटिव सपोर्ट नहीं दे पा रहे थे। इनके स्थान पर अधिक क्षमता वाले नए कैपेसिटर बैंक स्थापित किए गए हैं। इससे रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता में अब तक 309 एमवीएआर की वृद्धि हुई है।

–कैपेसिटर बैंक से वोल्टेज स्थिरता में मदद–

श्री मंसूरी ने बताया कि सिंचाई पंप, औद्योगिक मोटरें और अन्य विद्युत उपकरण सामान्यतः इंडक्टिव लोड उत्पन्न करते हैं, जिससे वोल्टेज में गिरावट और पावर फैक्टर में कमी आ सकती है। कैपेसिटर बैंक आवश्यक रिएक्टिव पावर उपलब्ध कराकर इस प्रभाव की भरपाई करते हैं। इससे वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार, पावर फैक्टर बेहतर बनाए रखने और पारेषण प्रणाली की दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button