सोने की कीमतों में आए अचानक उछाल का मुख्य कारण क्या है?
स्थानीय स्तर पर आभूषण विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों की ताजा लिवाली ने सोने की कीमतों को ऊपर उठाने में मदद की है। इसके अलावा, एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) सौमिल गांधी का कहना है कि अमेरिका की बढ़ती व्यापार संरक्षणवाद नीतियों और मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण निवेशकों का रुझान एक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की तरफ बढ़ा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की क्या स्थिति है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति थोड़ी मिश्रित है। स्पॉट सिल्वर 1.42 डॉलर (1.6 प्रतिशत) चढ़कर 89.72 डॉलर प्रति औंस हो गया है, जबकि वैश्विक स्तर पर सोना मामूली गिरावट के साथ 5,172.17 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। ‘मीरा एसेट शेयरखान’ के कमोडिटीज एंड करेंसीज हेड प्रवीण सिंह के अनुसार, स्पॉट गोल्ड फिलहाल 5,180 डॉलर के आसपास स्थिर है, क्योंकि व्यापारी ‘अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते’ पर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों का इस पर क्या असर पड़ रहा?
डॉलर के स्थिर बने रहने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में बहुत बड़ी तेजी सीमित हो गई है।
आगे निवेशकों को किन प्रमुख आंकड़ों और घटनाक्रमों पर नजर रखनी चाहिए?
सौमिल गांधी के अनुसार, अब निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिका के वृहद आर्थिक आंकड़ों, विशेषकर ‘प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स पर रहेगा जो आज जारी होने वाला है। यह महंगाई का आंकड़ा फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों और डॉलर व बुलियन (सोना-चांदी) की दिशा तय करेगा। इसके अलावा, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के सदस्यों के भाषणों पर भी बाजार की पैनी नजर रहेगी, जिससे सोने को नई गति मिल सकती है।
अब आगे के लिए क्या अनुमान?
भू-राजनीतिक घर्षण और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं सोने की सेफ-हेवन मांग को लगातार एक मजबूत समर्थन दे रही हैं। हालांकि, निकट भविष्य में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख ही यह तय करेगा कि सर्राफा बाजार में यह तेजी आगे कैसा प्रदर्शन करेगी।