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एनएसयूआई ने वीआईटी परिसर में अवैध अस्पताल संचालन के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई

VIT University में अवैध अस्पताल संचालन , एनएसयूआई ने एफआईआर की मांग उठाई 18 हजार छात्रों की जान जोखिम में? VIT परिसर में बिना अनुमति डेंटल हॉस्पिटल संचालित एनएसयूआई का बड़ा आरोप: नियमों को ताक पर रखकर चल रहा ‘डेनेशिया अपोलो डेंटल हॉस्पिटल’

भोपाल – भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) मध्यप्रदेश द्वारा VIT University परिसर में बिना वैधानिक अनुमति संचालित किए जा रहे “डेनेशिया अपोलो डेंटल हॉस्पिटल” एवं अन्य क्लिनिकों के विरुद्ध कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए तत्काल एफआईआर एवं कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।

एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 18,000 विद्यार्थी अध्ययनरत एवं निवासरत हैं। ऐसे में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, पंजीयन एवं आवश्यक लाइसेंस के अस्पताल/क्लिनिक का संचालन किया जाना न केवल मध्यप्रदेश नर्सिंग होम स्थापना अधिनियम, 1973 एवं अन्य लागू स्वास्थ्य कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन एवं स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

रवि परमार ने बताया कि दिनांक 01 मार्च 2026 को विश्वविद्यालय की ट्रस्टी श्रीमती रामानी बाल सुंदरम द्वारा परिसर में “डेनेशिया अपोलो डेंटल हॉस्पिटल” का उद्घाटन किया गया। एनएसयूआई का आरोप है कि यह संस्थान आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के बिना संचालित किया जा रहा है। पूर्व में भी विश्वविद्यालय परिसर में बिना अनुमति क्लिनिक एवं डे-केयर सेंटर संचालित किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं।

परमार ने बताया कि पूर्व में भी दूषित भोजन एवं पेयजल के कारण विश्वविद्यालय के अनेक विद्यार्थी गंभीर रूप से बीमार पड़े थे तथा एक विद्यार्थी की दुखद मृत्यु भी हुई थी। उस दौरान परिसर में समुचित एवं विधिसम्मत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने से छात्रों को उपचार हेतु भटकना पड़ा था। घटना के विरोध में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए थे और परिसर में भारी आक्रोश की स्थिति निर्मित हुई थी।

एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर का कहना है कि डॉ. प्रशांत त्रिपाठी, प्रो. पूजा त्रिपाठी एवं ट्रस्टी श्रीमती रामानी बाल सुंदरम की कथित मिलीभगत से यह अवैध संचालन किया जा रहा है। संगठन द्वारा पूर्व में भी माननीय मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, जिला कलेक्टर सीहोर, पुलिस अधीक्षक सीहोर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को दस्तावेजों सहित शिकायत प्रस्तुत की गई थी, किन्तु आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

अक्षय तोमर ने कहा कि यदि किसी निजी विश्वविद्यालय को चिकित्सा सुविधा संचालित करनी है तो उसे संबंधित अधिनियमों के अंतर्गत विधिवत पंजीयन, लाइसेंस एवं सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। कानून से ऊपर कोई भी संस्था नहीं है। प्रशासन की निष्क्रियता से यह प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को संरक्षण प्राप्त है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

एनएसयूआई की प्रमुख मांगें:

1. पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
2. बिना अनुमति संचालित अस्पताल/क्लिनिक को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए।
3. संबंधित ट्रस्टी, चिकित्सकों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता एवं मध्यप्रदेश नर्सिंग होम स्थापना अधिनियम के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
4. विद्यार्थियों के लिए वैधानिक एवं सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

एनएसयूआई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन प्रदेशव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन प्रारंभ करेगा तथा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करेगा। विद्यार्थियों के जीवन एवं स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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