कोलकाता, 29 मार्च 2026: समय पर सही निदान और समन्वित मल्टी-डिसिप्लिनरी उपचार की अहमियत को दर्शाते हुए, मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे के डॉक्टरों ने एक जटिल मामले का सफलतापूर्वक इलाज किया, जिसमें स्त्रीरोग संबंधी समस्या के साथ-साथ एक अनपहचानी रक्त संबंधी बीमारी भी शामिल थी। मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे की कंसल्टेंट – ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, डॉ. अभिप्सा मजूमदार और कंसल्टेंट – क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, डॉ. सुमित मित्रा ने मिलकर 39 वर्षीय महिला मरीज (नाम परिवर्तित – सुस्मिता दास), जो कांकुड़गाछी, कोलकाता की निवासी हैं, का उपचार किया। वह कई वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। एक सुनियोजित प्रक्रिया के माध्यम से इस केस का सफल प्रबंधन किया गया, जिससे मरीज को कम दर्द, तेजी से रिकवरी और बिना किसी बाहरी सर्जिकल निशान के उपचार मिला।
सुस्मिता दास पहली बार अगस्त 2025 में डॉ. अभिप्सा मजूमदार के पास अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंचीं। उनका हीमोग्लोबिन स्तर घटकर लगभग 5–6 g/dL रह गया था, जो गंभीर एनीमिया का संकेत था। इससे पहले कई अस्पतालों में परामर्श लेने के बावजूद उनकी बीमारी का सही निदान नहीं हो पाया था। क्लिनिकल जांच के दौरान डॉ. मजूमदार ने उनके प्लीहा (स्प्लीन) और लिवर के असामान्य रूप से बढ़े हुए आकार को पहचाना। प्लीहा के इस बढ़ाव को स्प्लेनोमेगाली कहा जाता है, जो किसी छिपी हुई रक्त संबंधी बीमारी का संकेत हो सकता है। इस संदेह के आधार पर उन्हें आगे की जांच के लिए तुरंत डॉ. सुमित मित्रा के पास भेजा गया।
आगे की जांचों, जिनमें बोन मैरो बायोप्सी (रक्त बनाने वाली कोशिकाओं की जांच) शामिल थी, से पुष्टि हुई कि मरीज को क्रॉनिक मायलॉयड ल्यूकेमिया (CML) है। यह एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो श्वेत रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है, लेकिन दवाइयों और नियमित फॉलो-अप के जरिए इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। हेमेटोलॉजी टीम के उपचार से मरीज की स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन 2–3 वर्षों से जारी अत्यधिक मासिक रक्तस्राव बना रहा।
मरीज का परिवार पूरा हो चुका था, लगातार लक्षण बने हुए थे और दवाइयों से पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा था, इसलिए हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय को हटाने की सर्जरी) की सलाह दी गई। हेमेटोलॉजी टीम से मेडिकल क्लीयरेंस मिलने के बाद, डॉ. अभिप्सा मजूमदार ने नॉन-डिसेंट वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी की, जिसमें पेट पर बिना कोई चीरा लगाए योनि मार्ग से गर्भाशय को हटाया जाता है। एडेनोमायोसिस (एक स्थिति जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत मांसपेशियों में बढ़ जाती है, जिससे दर्द और भारी रक्तस्राव होता है) के कारण गर्भाशय का आकार बढ़ा हुआ होने के बावजूद, यह सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई। हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए अंडाशयों को सुरक्षित रखा गया। इस प्रक्रिया से मरीज को कम दर्द, तेज रिकवरी और बिना किसी बाहरी निशान के सुरक्षित उपचार मिला।
डॉ. अभिप्सा मजूमदार ने कहा, “जब मरीज पहली बार हमारे पास आईं, तब उनकी स्थिति काफी गंभीर थी, जिसमें गंभीर एनीमिया और लगातार भारी मासिक रक्तस्राव शामिल था। जांच के दौरान प्लीहा का बढ़ा हुआ आकार हमें किसी छिपी हुई रक्त संबंधी बीमारी की ओर संकेत देता है, जिससे अंततः CML का निदान हुआ। उचित उपचार से उनकी स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन स्त्रीरोग संबंधी समस्याएं उनके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती रहीं। केस की जटिलता को देखते हुए हमने नॉन-डिसेंट वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी का विकल्प चुना, जो बिना किसी बाहरी चीरे के की जाती है और इसमें जोखिम कम, दर्द कम तथा रिकवरी तेज होती है। यह केस दर्शाता है कि समग्र और समन्वित उपचार दृष्टिकोण से जटिल से जटिल मामलों का भी सफल प्रबंधन संभव है।”
अपनी राहत और आभार व्यक्त करते हुए सुस्मिता दास ने कहा, “कई वर्षों से मैं अत्यधिक रक्तस्राव और कमजोरी से जूझ रही थी। कई अस्पतालों में जाने के बाद मैंने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी। मणिपाल हॉस्पिटल आने के बाद मुझे सही निदान और उपचार मिला। डॉक्टरों ने हर बात स्पष्ट रूप से समझाई और पूरे इलाज के दौरान मेरा साथ दिया। सर्जरी के बाद अब मैं काफी बेहतर महसूस कर रही हूं, खासकर क्योंकि कोई बाहरी निशान नहीं है और रिकवरी भी बहुत सहज रही। मुझे नया जीवन देने के लिए मैं मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे की पूरी टीम की आभारी हूं।”
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