अनिश्चितता से उपजा असंतोष अक्सर आंदोलन का कारण बनता है : मनोज मीक भोपाल पर असमान शुल्क नहीं, स्पष्ट शहरी नीति चाहिए : क्रेडाई

भोपाल। मध्यप्रदेश के अन्य नगर निगमों में स्थगित व्यावसायिक लाइसेंस शुल्क की वसूली केवल भोपाल में जारी रखने के विरोध में भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष गोविन्द गोयल और चेंबर के पदाधिकारियों के नेतृत्व में नगर निगम परिषद परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। भोपाल के सभी व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में व्यापारी इसमें शामिल हुए। चेंबर की कार्यकारिणी में हाल ही में सह-योजित किए गए क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक के साथ सचिव सुनील गुप्ता, कोषाध्यक्ष संजीव ठाकुर, उपाध्यक्ष अजय शर्मा तथा यूथ विंग के अध्यक्ष आकाश क्षिंगन सहित अनेक सदस्यों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। व्यापारियों की व्यापक मांग के बीच परिषद ने शुल्क समाप्त करने का प्रस्ताव पारित कर राज्य शासन को भेजने का निर्णय लिया।
मनोज मीक ने कहा, “अगस्त की शुरुआत से सीलिंग और नोटिसों का विरोध, नए मास्टर प्लान के लिए मार्च और प्रदर्शन तथा अब लाइसेंस शुल्क के विरुद्ध धरना ये अलग-अलग घटनाएं नहीं, भोपाल में गहराते नियोजन एवं प्रशासनिक विश्वास-संकट के संकेत हैं। राजधानी 21 वर्षों से नये मास्टर प्लान और ज़ोनल प्लानों के बिना चल रही है। वैध व्यावसायिक भूमि और नियोजित बाज़ारों के पर्याप्त विकल्प नहीं बने, किंतु आजीविका पर अचानक दंडात्मक कार्रवाई और भोपाल-विशेष शुल्क का बोझ डाला जा रहा है। अनिश्चितता से उपजा असंतोष अक्सर आंदोलन का कारण बनता है।”
उन्होंने कहा कि नियमों का पालन आवश्यक है; रहवासियों का शांत, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण पाने का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह व्यापारी बनाम रहवासी का संघर्ष नहीं, बल्कि दीर्घकालीन नियोजन-विफलता का परिणाम है। समाधान सड़क की चौड़ाई, क्षेत्र की वहन-क्षमता, पार्किंग, अग्नि-सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों पर आधारित वैज्ञानिक मिश्रित भू-उपयोग नीति में है।
डेवलपर्स भी मरम्मत शुल्क, असंगत संपत्ति-कर निर्धारण तथा विकास और भवन अनुज्ञाओं की जटिल एवं विलंबित प्रक्रियाओं से जूझ रहे हैं। देशभर में विभिन्न वर्गों के बढ़ते धरने-प्रदर्शन बताते हैं कि असंगत नियम, संवादहीन निर्णय और प्रशासनिक अनिश्चितता जनता का भरोसा कमज़ोर करते हैं।
क्रेडाई ने परिषद के निर्णय का स्वागत करते हुए राज्य शासन से प्रस्ताव को तत्काल स्वीकृति देने और तब तक शुल्क-वसूली स्थगित रखने का आग्रह किया। साथ ही समयबद्ध मास्टर एवं ज़ोनल प्लान, उचित निर्देशों के अनुरूप व्यावहारिक व्यवस्था तथा उच्चस्तरीय समिति में व्यापारी, रहवासी, डेवलपर और शहरी विशेषज्ञों को प्रतिनिधित्व देकर 30 दिनों में स्थायी समाधान प्रस्तुत करने की मांग की।



