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सोशल मीडिया पर सख्ती: 2.98 लाख URL हटाने की मांग, राज्यों से 82% मामले; आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई की वजह क्या?

सोशल मीडिया पर कथित गैरकानूनी सामग्री हटाने को लेकर सरकारों की कार्रवाई का बड़ा आंकड़ा सामने आया है। मार्च से जुलाई 2026 के बीच करीब 2.98 लाख यूआरएल हटाने के लिए भेजे गए। इनमें से करीब 2.44 लाख यूआरएल राज्यों की ओर से भेजे गए। यह कुल मामलों का 82 फीसदी है। सरकार की तथ्य जांच इकाई पीआईबी फैक्ट चेक ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

36 घंटे से तीन घंटे कैसे हुई समयसीमा?
पीआईबी फैक्ट चेक के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थ नियम, 2021 में फरवरी में संशोधन किया गया था। इसका उद्देश्य गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ कार्रवाई तेज करना था। संशोधन के बाद सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई।आई4सी ने 51 हजार यूआरएल क्यों भेजे?
मार्च से जुलाई 2026 के दौरान कुल करीब 2.98 लाख यूआरएल हटाने के लिए भेजे गए। इनमें से 2.44 लाख यूआरएल राज्यों ने भेजे। वहीं, 51 हजार यूआरएल भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी आई4सी ने भेजे थे। ये मामले साइबर अपराध, बुनियादी ढांचे और शेयर बाजार में निवेश से जुड़ी ठगी के संदर्भ में थे। पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि पिछले दो वर्षों में आई4सी की ओर से जिन गैरकानूनी सामग्रियों की सूचना दी गई, उनमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय धोखाधड़ी, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों से संबंधित सामग्री प्रमुख रही। छात्र प्रदर्शनों के बीच शिकायतें
यह अवधि नीट पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए व्यापक छात्र प्रदर्शनों के दौरान की भी रही। इस दौरान कई राजनीतिक नेताओं, सोशल मीडिया प्रभावकों और अन्य लोगों ने शिकायत की थी कि उनकी सामग्री सोशल मीडिया मंचों पर रोकी जा रही है। मुख्य रूप से मेटा के मंच इंस्टाग्राम को लेकर ऐसी शिकायतें सामने आई थीं।हर 68 सेकंड में 78,703 सामग्री पोस्ट करते हैं लोग
पीआईबी फैक्ट चेक ने यह जानकारी उन हालिया रिपोर्टों के जवाब में दी, जिनमें कहा गया था कि सरकार की तीन घंटे में सामग्री हटाने की शर्त को पूरा करने के लिए मेटा ने सामग्री रोकने की प्रक्रिया को स्वचालित कर दिया है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इन रिपोर्टों को भ्रामक बताया। इकाई ने कहा कि मेटा के अनुरोध पर एपीआई एकीकरण 2025 में हुआ था। पीआईबी फैक्ट चेक के अनुसार, भारत में 60 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। वे हर 68 सेकंड में 78,703 सामग्री पोस्ट करते हैं। इकाई ने कहा कि ऐसे में औसतन यह उम्मीद की जा सकती है कि इनमें से कोई सामग्री गैरकानूनी हो सकती है।

पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि राज्य और उसकी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकतीं। साइबर जगत में कानूनविहीनता को खुली छूट नहीं दी जा सकती। इकाई ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थ सक्षम प्राधिकारियों की ओर से भेजी गई सूचनाओं पर कार्रवाई करते हैं। संबंधित मंत्रालय या राज्य सरकार की ओर से अधिसूचित केवल अधिकृत अधिकारी ही सहयोग के माध्यम से गैरकानूनी सामग्री हटाने के लिए सूचना भेज सकते हैं। ऐसी सभी सूचनाओं की संबंधित सरकारें समय-समय पर समीक्षा करती हैं।

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