विदेश

बगदाद से मशहूर अमेरिकी जर्नलिस्ट शेली किटलसन का अपहरण, चेतावनी नजरअंदाज करना भारी पड़ा

बगदाद: इराक के गृह मंत्रालय ने बताया कि मंगलवार को बगदाद में अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शेली किटल्सन का कुछ अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया। सुरक्षा बल अपहरणकर्ताओं का पता लगाने में जुटे हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि “सटीक खुफिया जानकारी” के आधार पर तुरंत एक ऑपरेशन शुरू किया गया। मंत्रालय ने आगे बताया कि अधिकारियों ने अपहरणकर्ताओं की मानी जा रही एक गाड़ी को रोका, जो भागने की कोशिश के दौरान गाड़ी पलट गई। हालांकि, उस गाड़ी में किटल्सन मौजूद नहीं थीं।

शेली किटल्सन अमेरिकी नागरिक हैं। उन्होंने इटली में कई साल बिताएं हैं। वह फिलहाल रोम में रहती हैं। किटल्सन अफगानिस्तान, इराक और सीरिया जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों से अपनी साहसी रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं। अमेरिकी सरकार ने उन्हें पहले ही खतरे की चेतावनी दी थी। ऐसी भी रिपोर्ट है कि ट्रंप प्रशासन ने किटल्सन को इराक न जाने की सलाह भी दी थी। इसके बावजूद वह इराक गईं और वहां रिपोर्टिंग भी की।

ईरान समर्थित मिलिशिया पर शक

ऐसा अंदेशा है कि इस अपहरण के पीछे ईरान समर्थित मिलिशिया का हाथ हो सकता है। इराक में बड़े पैमाने पर ईरान समर्थित मिलिशिया मौजूद हैं। इन्हें इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक के नाम से भी जाना जाता है। ये समूह पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस (PMF) का हिस्सा हैं। इनमें कताइब हिजबुल्लाह, असाइब अहल अल-हक, बद्र ऑर्गेनाइजेशन, हरकत अल-नुजाबा और कताइब अल-इमाम अली शामिल हैं।

इराक में ईरानी मिलिशिया की मौजूदगी

 

  • इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया बड़े पैमाने पर मौजूद हैं। इनकी संख्या 100000 के करीब आंकी गई है।
  • इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया को इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक के रूप में भी जाना जाता है।
  • ये इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस (PMF) या ‘हशद अल-शाबी’ का हिस्सा हैं, जो इराकी सुरक्षा बलों में भी शामिल हैं।
  • इराक में प्रमुख ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों में कताइब हिजबुल्ला प्रमुख है, जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई हमलों में शामिल रहा है।

एलिजाबेथ त्सुरकोव के अपहरण की याद ताजा

इससे पहले मार्च 2023 में बगदाद के एक कैफे से रूसी-इजरायली शोधकर्ता एलिजाबेथ त्सुरकोव का अपहरण किया गया था। उनका अपहरण ईरान समर्थिक मिलिशिया कताइब हिजबुल्लाह ने किया था। उन्हें 903 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। बाद में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए एक समझौते के तहत एलिजाबेथ को रिहा किया गया था।

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